प्राचीन भारत की विमान Technology, आधुनिक विश्व से भी उन्नत

 Aircraft Technology in ancient india


 Aircraft Technology in ancient india

प्राचीन भारत की विमान Technology, आधुनिक विश्व से भी उन्नत

प्राचीन काल के महान ऋषि भारदवाज ने विमानों के विभिन्न प्रकार बताये हैं | उनके निर्माण में काम आने वाली धातु का वर्णन उनके ग्रन्थ विमान शास्त्र में किया गया हैं | विमान शास्त्र में 31 प्रकार के यंत्र तथा उनका विमान में किस प्रकार प्रयोग किया जाता है | इसका विस्तार से वर्णन किया गया हैं | इसमें विमान उड़ाने के तरीके बताये गए हैं तथा अच्छे पायलेट के गुण भी बताये गए हैं | इनमे से कुछ प्रयोगों व धातुओं को खोजने में भारतीय वैज्ञानिकों को सफलता मिली है लेकिन बहुत सी ऐसी तकनीक को decode करने में सफलता प्राप्त नहीं हुई हैं | जो दुनिया बदल सकती हैं | प्राचीन भारत की विमान Technology, आधुनिक विश्व से भी उन्नत थी |

कुछ यंत्रों की जानकारी निम्नानुसार हैं –
  1. विश्व क्रिया दर्पण ( World Action Mirror ) – इस यंत्र के द्वारा विमान के आस – पास चलने वाली गतिविधियों का दर्शन पायलेट को विमान के अन्दर होता हैं | इसे बनाने में अभ्रक ( Mica ) तथा पारा ( Mercury ) आदि का प्रयोग होता हैं |
  2. परिवेष क्रिया यंत्र ( Ambient Action Machine ) - इसमें ऑटो पायलेट सिस्टम का वर्णन हैं |
  3. शब्दाकर्षण यंत्र ( Phrasing Machine ) – इस यंत्र के द्वारा 26 किलोमीटर क्षेत्र की आवाज सुनी जा सकती हैं तथा पक्षियों की आवाज आदि सुनने से विमान को दुर्घटना से बचाया जा सकता हैं |
  4. गृह गर्भ यंत्र ( Homage Machine ) – इस यंत्र के द्वारा जमीन के अन्दर विस्फोटक पदार्थ खोजने में सफलता मिलती हैं |
  5. दिशा दर्शी यंत्र ( Directional Machine ) – यह दिशा दिखाने वाला यंत्र होता हैं |
  6. वक्र प्रसारण यंत्र ( Curve Circulation Machine ) – इस यंत्र के द्वारा शत्रु विमान अचानक सामने आ गया तो उसी समय पीछे मुड़ना संभव होता हैं |
  7.  शक्त्याकर्षण यंत्र ( Toxicology Machine ) – विषैली किरणों को आकर्षित कर उन्हें उष्णता में परिवर्तित करना और यह उष्णता वातावरण में छोड़ना संभव होता हैं |
  8. अपस्मार यंत्र ( Epilepsy Machine ) – युद्ध के समय इस यंत्र से विषैली गैस छोड़ी जा सकती हैं |
  9. तमोगर्भ यंत्र ( Tamogarbha Machine ) – इस यंत्र के द्वारा युद्ध के समय विमान को छिपाना संभव होता हैं | इसके निर्माण में तमोगर्भ लोहा प्रमुख घटक रहता हैं |
विमान को चलाने के लिए 4 प्रकार के ऊर्जा स्रोतों का महर्षि भारदवाज ने वर्णन किया हैं |
  1. वनस्पति तेल – जो पेट्रोल की भांति काम करता हैं |
  2. पारे की भाप – जिसका प्राचीन शास्त्रों में शक्ति के रूप में उपयोग किया जाने का वर्णन हैं | इसके दवारा अमेरिका में विमान उडाने का प्रयोग किया गया | लेकिन विमान के ऊंचाई पर उड़ने पर विस्फ़ोट हो गया | इससे यह सिद्ध हुआ कि पारे की भाप का उपयोग ऊर्जा के रूप में किया जा सकता हैं |
  3. सौर ऊर्जा – सूर्य से प्राप्त सौर ऊर्जा का उपयोग विमान उड़ाने में करते हैं |
  4. वातावरण की ऊर्जा – बिना किसी अन्य साधन के सीधे वातावरण से ऊर्जा ग्रहण कर विमान उड़ाना | जैसे – समुद्र में पाल खोलने से नाव हवा के सहारे चलती हैं | उसी प्रकार अन्तरिक्ष में विमान वातावरण से ऊर्जा ग्रहण कर चलता रहेगा | यह वर्णन बताता है कि ऊर्जा स्रोत के रूप में प्राचीन भारत में कितना व्यापक विचार हुआ करता था |

 

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