घातक कीटनाशक D.D.T

 


घातक कीटनाशक D.D.T -

D.D.T का पूरा नाम Dichloro-Diphenyl-Trichloroethane होता हैं |

सामान्य सुत्र        -     C14H9Cl5

मोलर द्रव्यमान    -     354.48 g-mol-1

घनत्व                  -    0.99 g /cm3

विश्व में प्रति वर्ष लगभग 22 हजार व्यक्ति कीटनाशकों के जहरीले प्रभाव के कारण मारे जाते हैं जिनमे से एक तिहाई लोग भारतीय होते हैं | लगभग एक हजार कीटों में से एक कीट हानिकारक होता हैं | जिसे मारने के चक्कर में हम खेतों में कीटनाशक छिड़ककर अनेक लाभदायक कीटों को भी मार डालते हैं | जैसे – केंचुआ खेती के लिए लाभदायक होता है | ये भी कीटनाशकों के कारण मारे जातें हैं | ऐसा ही घातक कीटनाशक हैं D.D.T |

D.D.T एक ऐसा रसायन हैं, जो वातावरण और जीवित वस्तुओं में आसानी से विखंडित नहीं होता | यह खाध पदार्थों तथा शरीर के वसा में एकत्रित होता हैं और अधिक मात्रा में होने पर जीभ और होठों को बेकार कर डालता हैं | इससे यकृत और गुर्दे को नुकसान पहुँचता हैं तथा कैंसर भी हो सकता हैं | विखंडित नहीं होने के कारण यह माँ के दूध और भू - जल तक में पाया जाने लगा है | यह पक्षियों और मछलियों के लिए भी विष का कार्य करता हैं |

D.D.T का अविष्कार सन 1950 में पॉल हरमैन मूलर ने किया | D.D.T का उपयोग सबसे अधिक दुसरे विश्व युद्ध के बाद किया गया | मच्छरकीटों को नष्ट करने के लिये तैयार किया गया कीटनाशक D.D.T कुछ ही वर्षो बाद खेतों में कीटनाशक के रूप में लाया जाने लगा | WHO के अनुसार विश्व में हर वर्ष कीटनाशक जहर के कारण 10 लाख लोग प्रभावित होतें हैं |

लेकिन इसका अत्यधिक मात्रा में उपयोग किये जाने के कारण यह भूमि जल पादपों को प्रदूषित करता हैं तथा पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता हैं | यह अनेक वर्षों तक अपघटित नहीं होता हैं |

जैव-आवर्धन के कारण पक्षियों में D.D.T. की मात्रा बढ़ रही हैं | जिसके कारण इनके अंडे का कवच पतला बनता है और ये समय से पहले ही नष्ट हो जाते हैं | जिससे पक्षियों ( Birds ) की संख्या में कमी आती हैं | जैसे – गिद्धों, चील, बाज़ आदि |

No comments:

Recent Post

ads
Powered by Blogger.