चंद्रमा पृथ्वी पर जीवन के लिए अहम

 

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चंद्रमा पृथ्वी पर जीवन के लिए अहम -

चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह हैं | चंद्रमा और पृथ्वी के मध्य की दुरी 3,84,403 किलोमीटर हैं |

यह पृथ्वी की परिक्रमा 27.3 दिन में पूरा करता हैं और अपने अक्ष के चारों ओर एक पूरा चक्कर भी 27.3 दिन में पूरा करता हैं |

यही कारण हैं कि चंद्रमा का एक भाग ( हिस्सा ) पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता | जबकि दूसरा भाग सदैव पृथ्वी से दिखाई देता हैं |

चन्द्रमा की औसत परिक्रमण गति 1.030 किमी / सेकण्ड हैं | चंद्रमा पर स्वयं का वायुमण्डल भी नहीं हैं और न ही प्रभावी चुम्बकीय क्षेत्र हैं | चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का 1/6 भाग हैं | अर्थात् जो चीज पृथ्वी पर 60 किग्रा. की हैं वह चंद्रमा पर केवल 10 किग्रा. ही रह जाती हैं | डायनासोरों के युग में, जब चन्द्रमा आज की अपेक्षा पृथ्वी के निकट हुआ करता था | तब चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण पृथ्वी पर एक दिन लगभग 23 घंटे का होता था | और इससे कुछ अरब साल पहले पृथ्वी पर दिन केवल 4 से 5 घंटे का हुआ करता था | चंद्रमा लगातार पृथ्वी से दूर जा रहा हैं | जिससे पृथ्वी की गति धीमी पड़ रही हैं |

चंद्रमा पृथ्वी पर जीवन के लिए अहम भुमिका निभाता हैं | जबकि चंद्रमा पर अपना वायुमंडल नहीं हैं | पृथ्वी पर जो वस्तु 60 किलोग्राम भार की हैं उसका वजन चंद्रमा पर 10 किलोग्राम ही रह जाता हैं | चंद्रमा के कारण ही पृथ्वी पर ज्वारभाटा ( ज्वार के समय समुद्र का जल स्तर बढ़ जाता हैं ) आता हैं | जब चंद्रमा बिलकुल ठीक आपके सिर के उपर हो तो आपका वजन कुछ कम हो जाता हैं | चंद्रमा नहीं होता तो पृथ्वी पर एक दिन 24 घंटे का न होकर लगभग 6 घंटे का एक दिन होता | क्योंकि चंद्रमा, पृथ्वी के घुमने की रफ़्तार को गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कम करता हैंं |

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