महाभारत काल में मानव क्लोनिंग

 

Mahabhaarata Time

महाभारत काल ( Mahabhaarata Time ) में मानव क्लोनिंग -

मानव क्लोनिंग ( cloning ) जो की आज के समय के नई और विश्वसनीय तकनीक लगती है | लेकिन आप जब जानेगे की महाभारत काल में मानव क्लोनिंग हुई थी  तो आप को आश्चर्य होगा

आपको जान कर आश्चर्य होगा कि हमारे पूर्वजों ने महाभारत काल ( mahabhaarata time ) में ही क्लोनिंग कर दिखाई थी | महाभारत के आदिपर्व में इसका वर्णन अध्याय -  115 में मिलता है | कुन्ती को सूर्य के समान तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ |

यह सुनकर गांधारी ने, जिसे 2 वर्षों से गर्भ होने के बावजूद संतान की प्राप्ति नहीं हुई | जिससे परेशान होकर गांधारी ने स्वयं अपना गर्भपात कर लिया | गर्भपात होने के बाद लोहे के गोले के समान माँसपेशिया निकली | इस समय व्यास ऋषि को बुलाया गया | उन्होंने इस ठोस मांसपेशियों का निरीक्षण किया |

व्यास ऋषि ने इस मांसपेशियों को एक कुण्ड में ठंडा कर विशेष दवाओं से सिंचित कर सुरक्षित किया | बाद में इन मांसपेशियों को 100 गांठ ( पर्वों ) में बाँटा तथा 100 घी से भरे कुण्डो में रख कर 2 वर्षों तक सुरक्षित रखा |

2 वर्ष बाद क्रमानुसार गांधारी के 100 पुत्र क्लोनिंग से ही जन्मे | महाभारत काल में शुक्राणु कोशिका यानी स्टेम सैल के द्वारा ही 100 कोरवों को जन्म देने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया का वर्णन इसमे लिखा हुआ हैं |

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