पौराणिक कथाओं में टाइम ट्रेवल ( सापेक्षवाद ) का जिक्र

 


पौराणिक कथाओं में टाइम ट्रेवल ( सापेक्षवाद ) का जिक्र -Time travel in ancient time

बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्वपुर्ण घटना सापेक्षवाद की खोज मानी जाती है |

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइनस्टाइन के time travel के सामान्य और विशेष सिद्धान्तों ने क्रान्तिकारी बदलाव ला दिए | पदार्थ और ऊर्जा में परस्पर परिवर्तन का सूत्र तथा क्वांटम सिद्धांत सापेक्षवाद के ही परिणाम हैं |

प्राचीन भारत के साहित्य में सापेक्षवाद ( Time travel in ancient time ) का उल्लेख स्थान -

स्थान पर हुआ है | हमारे पौराणिक ग्रन्थों की ये विशेषता रही है कि इनमे महत्वपुर्ण वैज्ञानिक सिद्धांत भी संकेतों के रूप में कथाओं में बताये गए हैं |

ब्रह्मपुराण के अनुसार - राजा रैवतक अपनी कन्या रेवती का विवाह न होने से दुखी थे | कोई और उपाय नहीं बचा तो वे ब्रह्मा के पास अपनी कन्या को लेकर पहुंचे और अपनी समस्या बताई |

ब्रह्मा ने रैवतक से कहा कि उनकी कन्या के लिए उपर्युक्त वर मौजूद है तथा वह उनके ही सिंहासन पर बैठा है | राजा यह सुनकर आश्चर्य चकित रह गये | और उन्होंने कहा – प्रभु यह आपकी कौनसी माया है |

इस पर ब्रह्मा जी ने रैवतक को समझाया – तुम जब ब्रह्मलोक से वापस पृथ्वी पर पहुँचोगे | तब तक तुम्हारी कई पीढ़िया बीत चुकी होगी | और जब तुम पृथ्वीलोक पहुँचो तो यादव कुल के राजकुमार बलराम से अपनी कन्या का विवाह कर देना |

दूसरी ओर अर्थात पृथ्वीलोक से ब्रह्मलोक जाने तथा लौटने में काशी नरेश को जितना समय लगा, उतने में पृथ्वी पर उनकी कई पीढ़िया गुजर गयी |

समय की गणना अन्तरिक्ष में यात्रा करने वाले काशी नरेश के लिए पृथ्वीवासियों से समय भिन्न हो गया | सापेक्षवाद में इसे ही समय यात्रा ( टाइम - डायलेशन ) कहा गया है |

इस सिद्धांत के अनुसार( time travel )  –

यदि कोई प्रकाश की गति से चलने वाले अन्तरिक्षयान में बैठकर किसी दुसरे तारे की यात्रा पर जाए और उस यात्रा में उसे 6 माह का समय लगे तो उसके लौटने तक पृथ्वी पर कई वर्ष का समय बीत चुका होगा | यात्रा में शारीरिक परिवर्तन भी होंगे | जो पृथ्वी पर 6 माह में होते हैं |

परन्तु पृथ्वी पर उसके वापस आने तक कई सौ वर्ष बीत चुके होंगे | प्राचीन काल में ऋषियों को इसकी जानकारी आम बात थी |

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