पॉलीथीन या प्लास्टिक का विकल्प बायोपॉलीमर का उपयोग

 

पॉलीथीन या पॉलीएथीन

पॉलीथीन या पॉलीएथीन

पॉलीथीन या प्लास्टिक का विकल्प बायोपॉलीमर का उपयोग -

सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है |

पॉलीएथिलीन एक पॉलीमर ( बहुलक ) है | जिसके कारण ये वर्षो तक भूमि में पड़े रहने के बाद भी नष्ट नही होती तथा पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है |

सामान्य सूत्र -



 पॉलीएथिलीन

यह एक ही प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण है | ये एथिलीन के अणुओं से बनता है |

 पॉलीमर ( बहुलक ) - 

पॉलीमर बहुलक अनेक मोनोमर की इकाईयों से मिलकर बनता है |

ये 2 प्रकार के होते हैं -

  1. प्राकृतिक पॉलीमर – सेल्युलोज, लकड़ी, रेशम, रबर आदि प्राकृतिक पॉलीमर की श्रेणी में आते हैं |
  2. कृत्रिम पॉलीमर – मानव निर्मित पॉलीमर जैसे - प्लास्टिक, पाईप, बोतलों, बाल्टियों, खिलौनों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली पॉलीथीन सिंथेटिक पॉलीमर है |
कृत्रिम पॉलीमर निम्न है –
  1. प्रोपाइलीन – मजबूत प्रकार के शीट कवर, पाइपो, बोतलों, तारों पर चढ़ाने वाला प्लास्टिक ही कृत्रिम पॉलीमर है |
  2. टेफ़लोन – वाल्व सील, गैस किट आदि |

सिंथेटिक रबर भी पॉलीमर है | उदाहरण – टायर बनाने में प्रयुक्त |

मकड़ियों में उपस्थित एक डोप नामक तरल पदार्थ उसके शरीर से बाहर निकलते ही ये प्रोटीन युक्त पॉलीमर के रूप में जाल ( Net ) बनाने में काम आता है | प्राकृतिक पॉलीमर है |

बहुत से बहुलक बायोडीग्रेड़ेबल नहीं होते हैं | उदाहरण – पॉलीथीन |

ये पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुचातें है | इसलिए वैज्ञानिकों ने इसके विकल्प के रूप में मक्का का बहुलक (कोर्न पॉलीमर ) का उपयोग किया गया है | कोर्न पॉलीमर से बनने वाली पॉलीथीन ( थैली, प्लास्टिक बैग ) जमीन में गाड़ दिए जाने के सिर्फ 10 दिन में कम्पोस्ट में बदल जाता है | कूड़े-कचरे में पड़े रहने पर भी ये 10 दिनों में नष्ट हो जाएगी |

पॉलीथीन का विकल्प बायोपॉलीमर हो सकते है |

बायोपॉलीमर –

सेल्युलोज, स्टार्च, काइटीन, प्रोटीन, पेप्टाइड, DNA, RNA आदि विभिन प्रकार के होते हैं |

इन बायोपॉलीमर में मोनोमेरिक इकाईयों के रूप में क्रमशः शर्करा, एमिनो अम्ल, न्युक्लियोटाइड होते हैं |

सेल्युलोज धरती पर पाया जाने वाला सबसे आम बायोपॉलीमर और कार्बनिक यौगिक है |

वनस्पति पदार्थ का 33 % ( सेल्युलोज )

कपास में 90 % ( सेल्युलोज )

लकड़ी में करीब 50 % ( सेल्युलोज ) पाया जाता हैं |

कुछ बायोपॉलीमर का जैव अव्क्रमीकरण किया जा सकता है | अर्थात उन्हें सूक्ष्म जीवाणुओं से CO2 और पानी से तोड़ा जा सकता है | इसके अलावा अनेक बायोपॉलीमर का समिश्रण किया जा सकता है | अर्थात उन्हें उद्दोगों में समिश्रण प्रक्रिया से 6 महीने के भीतर 90 % तक तोड़ा जा सकता है | जिन बायोपॉलीमर में ये क्षमता होती है |

पॉलीथीन के पॉलीमर से नोट ( करेंसी ) या सड़के बनाई जाए तो बहुत अच्छा होगा | क्योंकि पॉलीमर से बने नोटों का कटने - फटने का डर नहीं होगा तथा लम्बे समय तक बने रहेंगे | उदहारण – 20 माइक्रोमीटर से कम मोटाई की PLA फिल्म है | उससे अधिक मोटाई वाली फ़िल्म समिश्रण योग्य नहीं कहलाती है | भले ही वे जैव - अपघटन के लिए सक्षम क्यों न हो | समिश्रण पॉलीमर पैकेजिंग के लिए उपयोग हो सकते हैं | बायोपॉलीमर का कम्पोस्टीकरण भी संभव है |

कुछ जैव पॉलीमर उदाहरण – पॉलीलेप्टिक अम्ल, PLA, प्राकृतिक ज़ेन, पॉली –3– हायड्रोक्सी, ब्युटीरेट पॉलीएस्ट्रीन या पॉलीइथायलीन आधारितों को प्लास्टिक के स्थान पर प्लास्टिक की तरह उपयोग में लाये जा सकते हैं | जैव - पॉलीमर विघटित हो जाते हैं | उदाहरण – GH701 PLA मकई प्लास्टिक |

पॉलीथीन या प्लास्टिक

No comments:

Recent Post

ads
Powered by Blogger.