प्रथम जीव की उत्पति

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प्रथम जीव की उत्पति

प्रथम जीव का अजैविक जनन –

डार्विन ने कहा कि प्रथम जीव की उत्पति निर्जीव पदार्थों से हुई है |

उन्होंने सम्भावना प्रकट की अमोनिया, फ़ॉस्फोरस आदि लवण घुले गर्म पानी के किसी गड्डों में प्रकाश, ऊष्मा, विधुत आदि के प्रभाव से निर्जीव पदार्थों से पहले जीव की उत्पति हुई होगी |

स्टेनले मिलर के प्रयोग के अनुसार – पहले एमिनो अम्ल बने ये स्वतः ही पेप्टाइड बंधो से जुड़कर पोलीपेप्टाइड बन्ध बनने में सफल हुए होंगे | ये एमिनो अम्ल तथा पोलीपेप्टाइड जुड़कर गोलाकार झिल्ली व प्रोटीनॉयड माइक्रोस्फेयर में व्यवस्थित हो सकते थे | जैसा कि प्रारंभिक जीवन रहा होगा |



मात्र अणुओं का समूह ही जीवन नहीं है
  1. जीव कोशिका से बना होता है |
  2. प्रत्येक कोशिका का 90 प्रतिशत भाग जल है |
  3. जीवन के निर्माण में प्रयुक्त अधिकांश सहसंयोजक जैव अणु कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोज़न, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस तथा गंधक से बने होते हैं |
  4. जैव अणुओं जैसे – शर्करा, एमिनो अम्ल, न्युक्लियोटाइड, वसीय अम्ल, फोस्फोलिपिड़, विटामिन तथा सहएंजाइम आदि से बना एक छोटा समूह ही सम्पुर्ण सजीव सृष्टि का निर्माण करता है |
  5. प्रत्येक जीव के गठन में प्रमुख भाग बडे अणुओं प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट व नाभिकीय अम्ल का होता है |
  6. सभी जीव में उर्जा का प्रवाह फोस्फेट बन्ध ( ATP ) के जल अपघटन के माध्यम से होता है |
  7. सभी जीवों की कोशिकाओं में एक ही प्रकार की दोहरी लिपिड झिल्ली पाई जाती है |
  8. सम्पुर्ण जीव जगत में उपापचय क्रियाएँ एक छोटे समूह – ग्लायकोलाइसिस – क्रेब्स इलेक्ट्रोन स्थानान्तरण श्रंखला के माध्यम से सम्पन्न हुई है |
  9. विभाजित होने वाली प्रत्येक कोशिका में DNA का एक सेट जीनोम के रूप में होता है | यह RNA के रूप में सूचना निर्देश भेजता है | जिसका अनुवाद प्रोटीन के रूप में होता है|
  10. वृद्धि करती प्रत्येक कोशिका में राइबोसोम पाए जाते हैं | जो प्रोटीन संश्लेषण करते हैं |
  11. प्रत्येक जीन सूचनाओं का अनुवाद न्युक्लियोटाइड भाषा से विशिष्ट एंजाइम के सक्रियकरण व t-RNA के रूप में करता है |
  12. सभी जीव जीवित कोशिकाओं में पर्याप्त तीव्र गति से होने वाली रासायनिक क्रियाएँ एंजाइमो से उत्प्रेरित होती हैं |
इन सभी को मिलाकर जीवन की रूपरेखा तैयार होती हैं |

सिद्धांतो के अनुसार - समुद्र के पैंदे में बने चट्टानों पर स्थित सूक्ष्म छिद्रों में जीवन पनपा होगा | आज सभी जीव रासायनिक परासारणी है तथा प्रारंभिक जीव भी ऐसा ही रहा होगा |

वर्तमान जीवन ( life ) पूर्णतया DNA आधारित है लेकिन प्रोटीन के उत्प्रेरण से ही जीवन की सभी क्रियाएँ निर्देशित होती हैं |

अतः यह प्रशन उठना स्वभाविक है कि जीवन विकास के क्रम में पहले DNA आया या प्रोटीन ?

सन 1983 में थॉमस तथा सिडनी नामक वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए राइबोजाइम की खोज की | इन वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि RNA को अपने निर्माण व परिवर्तन मे किसी प्रोटीन की आवश्यकता नही होती | प्रोटीन की तरह कार्य कर सकने वाले RNA को ही राइबोजाइम नाम दिया गया | पृथ्वी पर जीव के प्रारंभ में RNA ही अणु जगत का सुप्रीमों था | RNA के त्रिगुणन तथा स्प्लांसिंग में राइबोजाइम आज भी सक्रिय हैं |

लेकिन RNA संशलेषण की प्रक्रिया इतनी सरल तो नही कि जीवन के प्रारंभ से ही उसकी भूमिका को स्वीकार लिया जाना जल्दबाजी होगी | अनुवांशिक पदार्थ DNA – RNA के संश्लेषण में उपापचय तंत्रों की भूमिका होती है |

धरती पर जीवन के लिए पहले RNA की ही भूमिका रही होगी |

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