ऊपर वाला आपको किसी का ऊपर वाला बनाकर भेज सकता हैं | मोटिवेशनल स्टोरी ( प्रेरणादायक कहानी )

लस्सी

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ऊपर वाला आपको किसी का ऊपर वाला बनाकर भेज सकता हैं | मोटिवेशनल स्टोरी ( प्रेरणादायक कहानी )

अगर पूरी धरा भी अगर साथ दे, तो कुछ और बात है | पर तू अगर जरा भी साथ दे, तो कुछ और बात हैं | यूं तो चलने को एक पाँव से भी चलते हैं लोग | पर दूसरा भी अगर साथ दे, तो कुछ और बात हैं |

ये कहानी जिसने लिखी है वो लिखते हैं | कि मैं अपने शहर से दूसरे शहर में जाकर के नौकरी कर रहा था | लेकिन जब कभी ही अपने शहर में आता था | तो अपने दोस्तों से मिलना नहीं भूलता था |

हमारी री – युनियन होती थी | और री – यूनियन के लिए हम जिस जगह पर मिलते थे | वो था हमारे शहर का प्रसिद्ध लस्सी वाला | छुट्टियों के दिन थे | मैं अपने घर आया हुआ था | मैंने आकर के अपने दोस्तों को कॉल लगाया | और बोला कि आ जाओ | अड्डे पर मिलते हैं |

हम सभी लस्सी वाले के यहाँ पर पहुँच गए | जाकर के हमने लस्सी का ऑर्डर दे दिया | गर्मियों के दिन थे | बाहर कुर्सियाँ लगी हुई थी | ऊपर कनात ( तिरपाल ) लगी हुई थी | हम सारे जाकर के तिरपाल के नीचे बैठ गए आराम से |

हम इंताजर कर रहे थे, कि लस्सी का गिलास आएगा | हंसी – मजाक चल रही थी | दोस्ती – यारी की बात चल रही थी | तभी मेरे सामने आकर के एक बूढ़ी अम्मा खड़ी हो गई | उनकी उम्र 75-80 साल रही होगी |

उनके हाथ में डंडा था और आँखे धंसी हुई थी | जुबान लड़खड़ा रही थी | कमर झुकी हुई थी | चेहरे पर भूख दिख रही थी | और आकर के बस इतना बोली – बेटा, ऊपर वाले के नाम पर कुछ दे दे |

मेरे आगे आकर के उन्होंने हाथ फैला दिए | मुझसे रहा नहीं गया | पता नहीं क्या हुआ ! वैसे मैं भिखारियों को भीख नहीं देता हूँ | लेकिन उस दिन पता नहीं क्या हुआ ? अपने आप मेरा हाथ मेरे बटुए की और चला गया | मैं सिक्के ढूंढ़ने लगा |

फिर पता नहीं दूसरा आइडिया आया, दूसरा ख्याल आया | मैंने बटुआ अपनी जेब में रख लिया | आप सोच रहे होंगे | कि शायद मैंने पैसे नहीं दिए | लेकिन मैंने उनसे कहा – दादीजी, क्या आप लस्सी पिएगी | और मैंने जैसे ही दादीजी कहा | उनके चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कान आ गई |

और मेरे दोस्त पीछे से देखने लगे कि यार ये क्या कर रहा हैं ? मतलब 5-7 रूपए में बात खत्म हो जाएगी | 10 रुपए में बात खत्म हो जाएगी | सिक्के देकर फ्री कर | लस्सी पिला रहा हैं ? वो भी 30 रूपए की |

मतलब दोस्तों को ऐसा लग रहा होगा | कि शायद मैं गरीब हो जाऊंगा | वो मुझे ठगकर के चली जाएगी | लेकिन मैंने फिर से पूछा – दादीजी, क्या आप लस्सी पीएगी ? दादीजी ना – नुकुर करते हुए धीरे से, हाँ उन्होंने भर दी |

और उनकी हाँ को देखकर के मुझे लगा | उनको सुनकर के मुझे लगा कि ये बहुत दिनों से भूखी हैं | पता नहीं क्या हुआ ? मैंने जोर से आवाज लगाई | कि भैया ! एक लस्सी और | दादीजी दूर जाकर के खड़ी हो गई |

फिर से मेरे पास आई | और अपनी पोटली में से कुछ सिक्के निकाले और बोली | कि बेटा, ये 5-7 रुपए हैं | आप जो पैसे उस लस्सी के दोगे | उस पैसे में ये पैसे मिला लेना | मेरे चेहरे से सारे भाव उड़ गए | मेरे आँखों के आंसू जैसे सूख गए | ऐसा मुझे लगा कि मैं सुन्न रह गया |

उन्होंने मुझे पैसे देने की बात कर दी | मैंने उनसे कहा – माफ़ कीजिए माताजी, आप जाकर के बैठिए | अभी लस्सी आ रही हैं | लस्सी वाले का नौकर आया | आकर के उसने सबको गिलास दे दिए | उनको भी गिलास दे दिया |

अब वो दूर जाकर के बैठ गई, नीचे जमीन पर | हम सब कुर्सियों पर बैठे हुए थे | अब वो कुर्सी मुझे काटने लगी | कि मैं यहाँ बैठा हुआ हूँ | वो नीचे बैठी हुए हैं | मन तो ऐसा कर रहा था | कि उनको बुलाऊं | अपने बगल की कुर्सी पर बिठाऊं |

लेकिन फिर लग रहा था | कि लोग सोचेंगे, अजीब आदमी हैं | मतलब भीख मांगने वाली महिला को यहाँ बैठा रहा हैं | ये कर रहा है वो कर रहा हैं | फिर दूसरा ख्याल आया | मैं उठा अपनी सीट पर से उनके पास जाकर के नीचे जमीन पर बैठ गया |

दोस्त देख रहे थे कि ये क्या हरकत कर रहा हैं ? तभी जो वो लस्सी वाला था, उसने दूर से आवाज लगाई | कि भैया, इधर आइए ! दो कुर्सी आपके लिए भिजवा रहा हूँ | उसका नौकर दो कुर्सी लेकर के आया | दादीजी को बिठाया, मुझे बिठाया |

उसके बाद वो लस्सी वाला बोला – सर जी, धन्यवाद मत कहिएगा | मेरी दुकान में ग्राहक तो हमेशा ही आते हैं | लेकिन इंसान कभी – कभार आते हैं | आज आपने यहाँ आकर के, ये सब करके मेरी आँखे खोल दी | मुझे बहुत बड़ी बात सिखा दी |

अब से मैं कोशिश करूंगा | कि मेरी दुकान के आस – पास अगर कोई ऐसा दिखे | तो मैं उसे फ्री में लस्सी पिलाऊंगा |

सीख – मदद करते चलिए | मुस्कान बांटते चलिए | अगर आपको ऊपर वाले ने इस काबिल बनाया हैं | कि आप किसी की मदद कर सके | तो आप मदद करने से पीछे मत हटिए |

कई लोग कहते हैं | कि भिखारियों को भीख नहीं देनी चाहिए | आप उन्हें पैसा मत दीजिए | लेकिन अगर आपको कोई गरीब आदमी दिख रहा हैं | तो उसे भोजन जरूर करवाए |

कब ऊपर वाला आपको किसी का ऊपर वाला बनाकर के भेज दे | आपको भी मालूम नहीं चलेगा | लोगों की दुआएं कमाना बहुत मुश्किल हैं | पैसे तो हर कोई कमाता हैं | दुआएं कमाइए |

Credit : MY FM

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