चेन्नई के 2 BHK फ़्लैट में अभिनव की पहली रात | होर्रर स्टोरी | भूत की कहानी


चेन्नई के 2 BHK फ़्लैट में अभिनव की पहली रात | होर्रर स्टोरी | भूत की कहानी

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1 एपिसोड़ 10

छोटे से शहर बरेली का रहने वाला अभिनव | नोएड़ा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था | अभिनव पढ़ाई – लिखाई में बहुत अच्छा था | लेकिन परिवार कि फाइनेंशियल सिचुएशन कुछ ख़ास नहीं थी |

वो भी बाकी स्टूडेंट्स की तरह मस्ती करना चाहता था | पैसे उड़ाना चाहता था | लेकिन ये कुछ हद तक संभव नहीं था | अभिनव के हाथ में उसकी इंजीनियरिंग की डिग्री थी | और उसने ठान लिया था | कि अब तो इतने पैसे कमाऊंगा | कि पैसे घर भेजने के बाद भी इतने जरूर बचे कि थोड़ी बहुत मस्ती जरूर कर पाऊं |

चेन्नई की एक कंस्ट्रक्शन कम्पनी में उसकी नौकरी भी लग गई | पहले 10 दिन उसने कम्पनी के गेस्ट हाउस में बिताए | इस बीच इधर – उधर खोजबीन के बाद उसे एक 2 BHK फ़्लैट रेंट ( किराए ) पर मिल गया |

ऑफिस से थका हारा अभिनव जब घर पहुँचा | तो रात का खाना बनाया | और उसके बाद किताबें पढ़ते – पढ़ते कब उसे नींद आई उसे पता ही नहीं चला | आधी रात में उसकी नींद एक आवाज से टूटी | घड़ी की तरफ देखा तो करीबन एक बजे थे उस समय |

आवाज घर के मेन गेट से आ रही थी | कई सवाल उमड़ रहे थे अभिनव के मन में | कौन हो सकता हैं इस समय ? क्योंकि इस शहर में तो वो ज्यादा लोगों को जानता भी नहीं हैं | जैसे – जैसे वो दरवाजे की तरफ आगे बढ़ रहा था | उसे एक अजीब सा भय अंदर तक सहमा रहा था |

ऐसा लग रहा था मानो कोई ठीक उसके पीछे हो | परन्तु पीछे घूमने की वो हिम्मत ना कर सका | बस 2 कदम के फासले पर था अभिनव उस दरवाजें से | कि अचानक वो आवाज बंद हो गई |

अभिनव ने फिर भी हिम्मत करके वो दरवाजा खोला | तो वहाँ कोई भी मौजूद नहीं था | अभिनव ने दरवाजें को बंद किया और वापस कमरें की तरफ जैसे ही आगे बढ़ा | एक बार फिर वो आवाज उसके कानों तक आई |

दरवाजा खोलने के लिए जैसे ही उसने अपने हाथ बढ़ाए | आवाज सामने के दरवाजें से आना बंद हो चुकी थी | क्योंकि इस बार दरवाजे पर हो रही दस्तक पीछे के दरवाजे से आ रही थी | पीछे था वो कमरा जो ब्रोकर ने अभिनव को नहीं दिया था |

उस दरवाजें के सामने लगा था एक ताला | और दरवाजें को कोई अन्दर से धक्का दे रहा था | अभिनव और बर्दाश्त नहीं कर पाया | और सीधा अपनी बिल्डिंग से बाहर निकलकर परेशानी वाली हालत में अपने दोस्त रिषी को फोन करने लगा |

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शहर नया था और ये घर भी | चेन्नई के इस 2 BHK फ़्लैट में, अभिनव की ये पहली रात थी | जो दरवाजों पर होने वाली दस्तक से उसे अंदर तक डरा चुकी थी | और गौरतलब बात ये थी कि दस्तक उस दरवाजें से आ भी रही थी | जिस कमरें के बाहर ताला लगा था |

अभिनव दर के मारे अपनी बिल्डिंग के बाहर भागा और डर के मारे रात करीबन 1:15 बजे अपने दोस्त रिषी  को फोन करने लगा | रिषी  के फोन उठाने पर अभिनव ने उसे सारी बात बताई | आधे घंटे के ठीक बाद रिषी  उसके घर के बाहर था |

दोनों एक साथ घर अंदर प्रवेश करते हैं | चारों तरफ सन्नाटा था | ना कोई दस्तक और ना ही कोई आवाज | दोनों काफी देर तक एक – दूसरे से बातें करते रहे और उसके बाद तकरीबन तीन – साढ़े तीन बजे उनकी आँख लगी |

रिषी को नींद में कुछ समझ नहीं आ रहा था | पर वो एक अजीब सी आवाज को सुन पा रहा था | ऐसी आवाज उसने आज से पहले कभी नहीं सुनी थी | जो आवाज उसे अब तक बड़ी दूर से सुने दे रही थी | वो अब धीरे – धीरे और भी ज्यादा जोर पकड़ते उसके कानों के पास आ रही थी |

रिषी इन चीजों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था | उसने अभिनव को नींद से जगाया और उसे सुनाई दे रही आवाज के बारे में बताया | अभिनव ने कहा – ये शायद उसका वहम हैं | अभिनव को कोई भी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी |

रिषी के सिर से पसीना तरबतर गिरे जा रहा था | क्योंकि उसे वो आवाज साफ़ तौर पर सुनाई दे रही थी | और वो उसे धीरे – धीरे पागलपन की ओर घसीट रही थी | तभी अचानक अभिनव ने कहा – क्या तुमने किसी के दरवाजें के खटखटाने की आवाज सुनी ?

रिषी ने बताया कि उसे दरवाजें को खटखटाने की कोई आवाज नहीं आ रही हैं | पर इस तरह की आवाज वा…..वा…….वा……वा………वा……..! सुनाई दे रही हैं |

रिषी और अभिनव दोनों ही कुछ अजीबोगरीब आवाजें सुन रहे थे | लेकिन दोनों को सुनाई देने वाली आवाजें अलग – अलग अलग थी !

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अभिनव को अपने घर में कुछ अजीब आवाजें सुनाई देती हैं | वो डर के मारे घर से बाहर जाकर अपने दोस्त को फोन करता हैं | घर में उसके दोस्त रिषी को कुछ और ! और अभिनव को कुछ और ! दोनों को अलग – अलग आवाजें सुनाई देती हैं |

दोनों वहाँ से भागकर रिषी के घर चले गए | रात बीतने के बाद सुबह होते ही अभिनव ने ब्रोकर को फोन लगाया | और रात वाली बात बताई | ब्रोकर ने कहा – साहब, नया शहर है, नए लोग हैं | इसलिए शायद आपको ऐसा लग रहा होगा |

अरे ! 2-3 दिन की बात हैं | एक बार आप इस माहौल से एडजस्ट हो जाएं | फिर देखिएगा सब ठीक हो जाएगा | पता नहीं क्यों पर अभिनव को ब्रोकर की बातें सही लग रही थी | उसने अपना काम खत्म करा | और थका हारा ऑफिस से लौटकर अपने घर का ताला खोल ही रहा था |

कि तभी पीछे से आवाज आई – तो आप ही हैं अभिनव साहब | सुना आपको बड़ी दिक्कत हुई रात को | पलटकर देखा तो सीढ़ी पर 45-50 साल का आदमी बैठा था | बातचीत आगे बढ़ी तो पता चला | कि वो इस मकान के मालिक हैं |

अभिनव ने घर का दरवाजा खोला और घर आए मेहमान को अपने साथ अन्दर ले गया | अभिनव ने कल रात घटी सारी घटना विस्तार से बताई | तो मकान मालिक ने पूछा – ये ब्रोकर ने आपको दूसरे कमरें की चाबी क्यों नहीं दी ?

वो ब्रोकर कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा | दोनों बाते ही कर रहे थे कि अचानक एक बार फिर दरवाजें पर वैसी ही दस्तक सुनाई दी ! जो कल रात अभिनव ने सुनी थी | अभिनव ने मकान मालिक से कहा – आपने सुना न ? कल रात से ही मुझे ये आवाज परेशान कर रही हैं |

मकान मालिक हैरान होकर अभिनव की ओर देख रहा था | क्योंकि उसे कुछ भी सुनाई नहीं दिया था | खैर हिम्मत जुटाकर अभिनव वहाँ से उठा | और कहा – मैं आपके लिए चाय बनाकर लाता हूँ | चाय बनाने के लिए किचन में जाना तो बहाना था |

ताकि वो उस दरवाजें पर नजर रख सके | जहाँ से वो आवाजें आ रही थी | उसने चाय बनाने के लिए पानी उबालना शुरू किया और साथ ही ब्रोकर को फोन लगाया | और कहा – यार, सच बताना इस घर में कोई गड़बड़ तो नहीं हैं ?

इस घर के मालिक हमारे साथ यहाँ बैठे हुए हैं और पूछ रहें हैं | कि दूसरे वाले कमरें में ताला क्यों लगा रखा हैं ? मकान मालिक का नाम सुनकर मानों ब्रोकर की हवाईयाँ उड़ गई | उसने दोबारा पूछा कि कौन आये हैं आपके यहाँ ?

अभिनव ने बताया – मकान मालिक ! और ये सुनते के साथ ही अभिनव ने फोन की लाइन काट दी !

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अभिनव को चेन्नई शिफ्ट किए हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे | उसके नए फ़्लैट में पहली ही रात अभिनव और उसके दोस्त ने अलग – अलग आवाजें सुनी ! और ठीक उसके अगले ही दिन जब अभिनव उसके घर में घुस रहा था |

मकान मालिक वहाँ सीढ़ीयों में बैठा हुआ था | जब अभिनव ने ब्रोकर को फोन करके बताया कि मकान मालिक घर आए हैं | और वो उनके साथ बात कर रहा हैं | तो ब्रोकर हड़बड़ाता हुआ, दौड़ता हुआ उनके घर पहुँचा |

दरवाजा खुला तो ब्रोकर के चेहरे की हवाईयाँ उड़ी हुई थी | और शरीर पसीने से भरा था | इससे पहले की अभिनव कुछ कहता | ब्रोकर ने पूछा – मकान मालिक कहा हैं ?

अभिनव ने कहा – यहीं मेरे साथ बैठे चाय पी रहें हैं | पर आप मुझे ये बताओ | कि आपने ये कमरा बंद करके क्यों रखा हैं ? इसकी चाबियाँ कहाँ हैं ?

उसने कहा – चाबियाँ तो मैं आपको दे दूंगा | पर क्या मैं एक बार मकान मालिक से मिल सकता हूँ ? अभिनव उन्हें अपने साथ कमरें में ले गया | सामने टेबल पर पड़ी थी | 2 कप चाय और आधी खाई हुई बिस्किट !

अभिनव कमरें में इधर से उधर झांक रहा था | क्योंकि जिस मकान मालिक की बात वो कर रहा था ! वो वहाँ मौजूद ही नही था | और गौरतलब है कि उस घर से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही द्वार था | जहाँ थोड़ी देर पहले अभिनव और ब्रोकर दोनों खड़े थे |

ब्रोकर ने कहा कि पता नहीं आप किसकी बात कर रहे थे ? क्योंकि इस मकान के मालिक ने आज से 5 साल पहले, उस बंद पड़े कमरें में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी !

ये घर उसने बहुत शौक से खरीदा था | रिशेसन के कारण उसकी नौकरी चली गई | धीरे – धीरे वो कर्ज में डूबता गया | मुसीबत की उस घड़ी में उसके परिवार ने भी उसका साथ छोड़ दिया | और उसके अकेलेपन ने उसकी जान ले ली |

उस घर से बाहर आने – जाने का सिर्फ एक ही दरवाजा था | अभिनव ने इस तरह की चीज आज तक कभी अनुभव नहीं करी थी | उसने ब्रोकर से कहा कि मैं इस घर में अब एक मिनट भी नहीं रह सकता | और सारी चीजें अपनी पैक करने लगा |

ब्रोकर ने भी उसकी मदद करी | दरवाजें को बंद करते वक्त उस ब्रोकर और अभिनव दोनों ने देखा कि कैसे उस बंद कमरें के दरवाजें पर कोई अंदर से दस्तक दे रहा था ! रात अभिनव ने रिषी के घर गुजारी | अभिनव और रिषी बातचीत कर ही रहे थे |

कि तभी अचानक उन्हें आवाज सुनाई दी …. वा…..वा…….वा……वा………वा……..! ठक…… ठक….. ठक….. ठक……. ठक….. ठक…….!

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

Credit : 93.5 Red FM India

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