जुहु भट्टी के लॉज के कमरें नंबर 06 में विनय और अमित के साथ क्या हुआ ? होर्रर स्टोरी ( भूत की कहानी )

चिट्ठी


जुहु भट्टी के लॉज के कमरें नंबर 06 में विनय और अमित के साथ क्या हुआ ? होर्रर स्टोरी ( भूत की कहानी )

Horror Story Ek Chitthi

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1 एपिसोड़ 11

Credit : Red FM India

कोई जरूरी नहीं कि लड़के किताबों के बीच अगर कोई चिट्ठी छुपाए | तो वो किसी लड़की को लिखा लव लेटर ही होगा |

किताबें जो होती है ना | वो जिंदगी का अलग ही मतलब सिखाती हैं | किताबों की अपनी अलग दुनिया और अलग जुबान होती हैं | कभी गए है आप ! इन किताबों की दुनिया में ? विनय को किताबें पढ़ने और घूमने – फिरने का बहुत शौक था |

उस दिन चंडीगढ़ के सेक्टर – 15 मार्केट से एक पुरानी सेकंड हैंड किताब खरीदी | दिनभर का काम ख़त्म करने के बाद | उसे रात 12 बजे के बाद ही वक्त मिला किताब को पढ़ने का | उसने टेबल पर बैठकर नाईट लैम्प जलाया |

किताब पढ़ने के लिए वो किताब खोल ही रहा था | कि उसमें से एक कागज का टुकड़ा नीचे गिरा | विनय ने कागज़ का टुकड़ा उठाया | तो देखा कि उसमें कुछ लिखा था | लैम्प की रोशनी में विनय ने उसे पढ़ना शुरू किया |

मेरा नाम अमित हैं | मैं यहाँ दार्जलिंग घूमने आया | पर पीक सीजन होने की वजह से किसी भी होटल में जगह नहीं मिली | टैक्सी ड्राइवर ने कहा कि आप यहाँ से 10 किलोमीटर नीचे जुहु भट्टी चले जाइए | वहाँ आपको लॉज जरूर मिल जाएगा |

मकान नंबर 13 का कमरा नंबर 06, जो मुझे मिला | थोड़ा गंदा है पर रहने को जगह मिल गई वो क्या कम हैं ? आज मैं पूरी रात सोया नहीं हूँ | इसका कारण मेरे कमरें के बाहर कुछ लोग बैठे बतौले – बाजी कर रहे थे |

आज यहाँ मेरा चौथा दिन हैं | पर पिछले 2 दिनों में मेरे साथ जो हुआ | उस पर यकीन करने को दिल नहीं कर रहा | उस रात जब मैं सोया | तो आधी रात गए | एक आवाज सुनी | मुझे लगा कोई चूहा वगैरह होगा | मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया |

लेकिन तकरीबन 15-20 सेकण्ड तक जब वो आवाज लगातार आती रही | तो मैंने उस आवाज को ध्यान से सुनना शुरू किया | वो आवाज मेरे बगल में पड़ी टेबल से आ रही थी | मैंने तुरंत नाईट लैम्प जलाया | तो देखा – धड़ाम…………………….!

जहाँ तक मुझे याद हैं | मैंने पानी पीकर गिलास टेबल के बीचो – बीच रखी | और लाईट जलाते वक्त मेरा हाथ भी गिलास या टेबल से टकराया नहीं था | आखिर ये हुआ तो हुआ कैसे ?

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चंडीगढ़ की सेक्टर 15 की किताबों की दुकान से विनय ने एक किताब खरीदी | जिसमें से उसे एक अमित नाम के एक लड़के की चिट्ठी मिली | उस चिट्ठी में उसने लिखा था | कि वो दार्जिलिंग घूमने तो गया था | लेकिन उसे वहाँ रूम नहीं मिला |

वो दार्जिलिंग से 10 किलोमीटर नीचे जुहु भट्टी में रहने गया | जुहु भट्टी के उस लॉज में अमित के साथ हुए कई सारे हादसे जिनका जिक्र उसने इस चिट्टी में किया था | पर वो एक आखिरी हादसा जिसके बारे में वो लिख रहा था पर पूरा नहीं लिख पाया उसे |

चिट्ठी की आखिरी लाइन थी | कोई मुझे खींच रहा हैं | शायद ये वाही आवा………………!

अरे यार ! एक आखिरी लाइन लिख देता तो ! कुछ ऐसा ही महसूस कर रहा था विनय | पर चिट्टी की कहानी को पूरा जानने के लिए | वो वीकेंड पर पहुँचा जुहु भट्टी | मकान नंबर 13 कमरा नंबर 06 | रूम सर्विस वाले के जाते ही विनय ने कमरें का एक – एक कोना छान मारा |

उसे कहीं कुछ नहीं मिला | न ही उस कहानी का बाकी हिस्सा, ना ही कुछ और जिससे वो पता लगा सके कि आखिरकार अमित के साथ हुआ क्या था ? सुबह के 4 बजे तक विनय जाग रहा था | कि अब कुछ होगा ! अब कुछ होगा ! पर सिवाय सवेरा होने के कुछ भी नहीं हुआ |

अपनी ही बेवकूफी पर हंसने लगा विनय | कि वो कागज़ के एक टुकड़े को पढ़कर यहाँ जुहु भट्टी तक आ गया | सुबह तो हो गई | पर आज की रात बहुत कुछ लाने वाली थी अपने साथ | फिर से जब 3 बजे तक कुछ नहीं हुआ | तो विनय गुस्से में सोने चला गया |

आँख लगते ही विनय को एक आवाज सुनाई दी | विन……………….य……! विन………………….य……! मैं अमित ! तुम मुझे ही ढूंढने आये थे ना………! प्लीज विन………….य…..! प्लीज …..मुझे बचाओ ! मुझे निकालो यहाँ से ! जल्दी ……….!

हा…अं… हा…अं.. हा…अं.. हा…अं……..हा……………….!

जिस अमित को वो जानता भी नहीं था | विनय ने ना सिर्फ उसकी आवाज सुनी | बल्कि उसका चेहरा भी देखा | इस सदमे से वो बाहर निकल ही नहीं पाया था | कि अपने कमरे के बाहर उसने एक आवाज सुनी | दरवाजा खोला तो बाहर कोई नहीं खड़ा था |

इसे अपना वहम समझकर जैसे ही उसने कमरे का दरवाजा बंद किया | कि लगभग तुरंत ……..! एक आवाज ………………!

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विनय एक किताब पढ़ रहा था | जिसमें उसे एक दो पन्नों की चिट्टी मिली | जिसमें जुहु भट्टी के एक लॉज का जिक्र कुछ यूं था | कि इस चिट्ठी के राइटर अमित को खोजता हुआ | विनय जुहु भट्टी के लॉज के कमरें नंबर 06 में पहुँच गया |

अभी एक सपने से उसकी नींद टूटी ही थी | कि उसने अपने कमरें के दरवाजे के बाहर कुछ आवाजें सुनी | इन आवाजों से डरकर विनय ने रात को ही अपना कमरा बदलवा दिया | कमरा नंबर 06 से उसे मिला अब कमरा नंबर 05 |

कमरा नंबर 05 में जाकर विनय ने जैसे ही ओढ़ने के लिए चद्दर तानी | कि उस चद्दर के बीच में से कुछ गिरा | विनय ने उठाकर देखा | तो वोटर आईडी कार्ड था | और उस पर नाम लिखा था अमित सिंह |

विनय को यकीन नहीं हो रहा था | kकि उसने सपने में जिस अमित को देखा | वो यही अमित था | कुछ तो गड़बड़ थी इस लॉज में | जिसका विनय को पक्का यकीन हो गया था | उसने सोच लिया था कि सुबह होते ही वो यहाँ से चेकआउट कर लेगा |

और नहीं चाहकर भी सोने का प्रयास करने लगा | उसकी आँख लगने ही वाली थी कि उसने अपने सपने सुनी आवाज को इस बार सपने में नहीं हकीकत में सुनी | विन……….य…..! मैं अमित ! मुझे ही ढूंढ़ने आए थे ना……… !

विनय बिस्तर से उठकर उस आवाज का पीछा करने लगा | पर वो आवाज मानों जैसे विनय के साथ खेल रही थी | उस आवाज का पीछा करते हुए | वो कमरें बायीं तरफ जाता तो आवाज दायीं तरफ से आती | और दायीं तरफ जाता तो आवाज बायीं तरफ से आती |

विनय कुछ सोच समझ नहीं पा रहा था | सुबह तक क्या | वो अब इस कमरें में 2 मिनट भी नहीं रह सकता था | उसने हड़बड़ी में अपना सामान पैक किया | और कमरें से निकलने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला – विन………………………य………..!

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जुहु भट्टी के एक लॉज में कमरा नंबर 06 से परेशान होकर विनय आधी रात अपना कमरा बदलवाया | उसका कमरा था 05 | कमरें में इतना कुछ हुआ कि वो परेशान हो गया | और जैसे ही उस कमरें से बाहर निकलने के लिए उसने दरवाजा आधा ही खोला था कि दरवाजा बंद हो गया | और साथ ही विनय भी |

किसी दीवार को खुरचने की आवाज आ रही थी | कमरें के अंदर किसी के लड़ने की आवाज आ रही थी | और रह – रहकर गिलास टूटने और चम्मच के गिरने की भी आवाज आ रही थी | धीरे – धीरे ये सारी आवाजें एक साथ मिलकर इतनी तेज हो गई | कि विनय को अपने हाथों से अपने कान बंद करने पड़े |

और वो चीखते हुए कहने लगा – बंद करो……! बंद करो…………..! बहुत हो गया | करीबन एक मिनट बॉस उसने अपने कानों से हाथ हटाए और आँखे खोली | तो वहाँ कोई आवाज नहीं थी | बस कमरें के अंदर एक गजब की ठंड थी |

टेबल पर रखा कम्बल जैसे ही विनय उठाने गया | तो उस दीवार के उस पार से एक आवाज आई | विनय ने दीवार से अपना कान लगाया | ताकि वो उस आवाज को साफ़ – साफ़ सुन सके | दीवार पर कान लगाने से पता चला कि दीवार खुरचने की आवाज दीवार के उस पार से नहीं बल्कि दीवार के अंदर से ही आ रही थी |

बड़े ध्यान से उस आवाज को सुनने की कोशिश की | तो सुनाई दी और एक आवाज विनय……! ये दीवार में घर हैं | और अब तुम्हारा भी ! हा….हा…..हा……हा….|

सर आपकी चा……………..| सर ! सर !

अमित को गायब हुए 6 महीनें और विनय को गायब हुए 3 महीनें हुए हैं | चंडीगड़ के सेक्टर 15 के मार्केट में एक किताब आई हैं | और उस किताब में है फिर से एक चिट्ठी | जिसकी आखिरी लाइन हैं …कोई मुझ अपनी तरफ खींच रहा हैं |

शायद ये वही आवा……………………….!

मैं हूँ अमित और मैं विनय …………! और आप…………….!

ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

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