मेले थाथ थेलो ना.............! भूतिया कहानी

मालिनी और शेखर

मेले थाथ थेलो ना………….! भूतिया कहानी

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1  एपिसोड 6

Credit : 93.5 Red FM India

मालिनी और शेखर की शादी को तकरीबन 2 साल हो गए थे | शेखर की लाइफ इतनी बिज़ी कि वो चाहकर भी मालिनी को टाइम नहीं दे पाता था | पर इस बात का मलाल मालिनी को जरा भी नहीं था | क्योंकि वो शेखर को अच्छी तरह से जानती थी |

और ये दोनों की लव मैरिज भी थी | दोनों बैंगलोर के एयरपोर्ट रोड़ के नजदीक अपने मकान में रहते थे | रोज की तरह लंच ख़त्म करके शेखर ने मालिनी को फोन किया | फोन रखने के करीबन 20 – 25 सेकंड बाद ही किचन में काम कर रही मालिनी को एक आवाज सुनाई दी |

मानो जैसे कोई ऊपर वाले कमरें में दौड़ रहा हो | ये आवाज सुनकर मालिनी चौंक चुकी थी | वो दौड़ती हुई कमरें में गई | कि कहीं कोई चोर – वोर तो नहीं हैं | कमरें में कोई नहीं था | ये देखकर मालिनी की सांस में सांस आई | और उसने कमरें की खिड़की बंद की |

और जैसे ही वो पल्टी उसने अपने कमरें में एक प्लास्टिक की गेंद देखी | जो आजतक उसने अपने घर में कभी नहीं देखी थी | इस बात को ज्यादा तवज्जो ना देते हुए | मालिनी ने हल्का – फुल्का दोपहर में खाना खाया और उसके बाद दोपहर की नींद लेने चली गई |

उसे सोए हुए कुछ ही वक्त हुआ था |  कि उसकी नींद एक आवाज से टूटी | ये आवाज TV रूम से आ रही थी | मालिनी को अच्छी तरह से याद था कि दोपहर का लंच करने के बाद उसने TV का स्विच ऑफ़ कर दिया था |

दोपहर की आधी नींद से वो उठी | और सीढ़ीयों के रास्ते जब वो TV रूम की ओर जा रही थी | तो यही सोचती जा रही थी | कि TV ऑन हुआ तो कैसे ? क्योंकि उसने तो TV बंद किया था | TV का वोल्यूम देखा तो पूरा फुल था | जैसे ही उसने TV का स्विच दबाकर उसे बंद करने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए |

कि उसके कानों में एक आवाज टकराई – तीवी तलने दो, बंद मत तलो !

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मालिनी की दोपहर की नींद अचानक TV की तेज आवाज से टूटी | उसने जाकर देखा तो TV चल रही थी | जैसे ही उसने TV को स्विच ऑफ़ करने के लिए हाथ बढ़ाया | तभी आवाज आई – तीवी तलने दो, बंद मत तलो !

डरी हुई मालिनी सीधा घर के बाहर भागी और सीधा उसने शेखर को फोन लगाया | शेखर सारा काम छोड़कर भागा – भागा घर आया | और डरी हुई सी मालिनी को अपने साथ घर के अन्दर ले गया | घर के अन्दर सब नॉर्मल था |

उसने मालिनी को कहा – तुम बेकार में डर रही थी | तुम अगर मुझ जैसे भूत को हैंडल कर सकती हो | तो उससे डरने की क्या जरूरत जो तुम्हें दिखाई ही नहीं दे रहा | देर रात तक बातें करने के बाद शेखर और मालिनी सोने चले गए |

रात करीबन 3 बजे टिन……..न..न..न..न..! टिन……..न..न..न..न..! टिन……..न..न..न..न..! मालिनी की नींद एक आवाज से टूटी | आवाज सुनकर ऐसा लग रहा था | मानों कोई उनके दरवाजें पर प्लास्टिक की बॉल मार – मार कर खेल रहा हो | मालिनी ने शेखर को नींद से उठाया और कहा – क्या तुम वो आवाज सुन पा रहे हो ?

रात 3 बजे मालिनी के मुंह से ऐसी बातें सुनकर थोड़ा झल्लाते हुए शेखर ने कहा – मालिनी बस करो यार बहुत बहुत हो गया | मैंने पहले ही कहा है तुमसे कि भूत – वूत कुछ नहीं होते हैं | तुम सो जाओ | तुम्हें नींद की जरूरत हैं |

मालिनी सोने की कोशिश करने लगी और साथ ही शेखर भी | सुबह 6 बजे शेखर की नींद टूटी | क्योंकि उसे प्यास लगी थी | सीढ़ीयों से होता हुआ शेखर फ्रिज के पास गया | फ्रिज से पानी की बोतल निकालकर वो पानी पी ही रहा था |

कि इस बार शेखर ने एक आवाज सुनी | टक….टक……टक……टक……टक.! फ्रिज की लाईट की रोशनी में उसने देखा कि प्लास्टिक की एक बॉल उसके पांव के पास पड़ी हैं | शेखर ने वो बॉल उठाई और दायें – बायें देख रहा था |

कि तभी उसके कानों में एक आवाज आई ! मेले थाथ थेलो ना………….! मेले थाथ थेलो ना………….!

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सुबह करीबन 6 बजे फ्रिज खोलकर शेखर पानी पी ही रहा था | कि एक आवाज आई | टक….टक……टक……टक……टक.! शेखर के पांव के पास पड़ी थी | एक प्लास्टिक की गेंद | शेखर ने जैसे ही वो बॉल उठाई उसके कानों में एक आवाज – मेले थाथ थेलो ना………….! मेले थाथ थेलो ना………….!

शेखर ने बॉल उठाई और हवा में दूसरी फेंकी | और बॉल वापस चली आई | टक….टक……टक……टक……टक.! थोड़ी देर बाद मालिनी बैडरूम से बाहर आई | और बोली – शेखर ये क्या कर रहे हो ?

हड़बड़ाता हुआ शेखर बोला – कुछ नहीं ! तुम तैयार हो जाओ | डॉक्टर के पास चलना हैं ना ! चेकअप कराने के लिए | मालिनी तैयार होने चली गई | और शेखर ने घड़ी की तरफ देखा | तो घड़ी में इस वक्त 7 बजे थे | मतलब पिछले एक घंटे से यही चल रहा था ………. टक….टिक……टक……टिक……टक…..टिक…..!

रूटीन चेकअप कराने गए तो पता चला कि मालिनी मां बनने वाली हैं | इस ख़ुशी में सारी बातें भुलाकर घर लौटते समय वो खिलौने, कपड़े, पालना बहुत सारी चीजें खरीदकर ले आये | आज का सारा दिन खिलौनो को जमाने और चीजों को इधर – उधर कराने में ही निकल गया |

मालिनी काफी थकी हुई थी | इसीलिए उस रात उसे बहुत ही सुकून की नींद आई | अगले सुबह शेखर ने भी उसे जगाया नहीं | खुद ही ब्रेकफ़ास्ट बनाया और निकल गया काम के लिए | मालिनी तकरीबन सुबह 9 बजे सोकर उठी | ब्रेकफ़ास्ट करने के लिए मालिनी नीचे गई |

और ब्रेकफ़ास्ट करके जैसे ही वो सिंक में प्लेट रख रही थी | कि एक आवाज – टिन…टन……..टिन…..टन…टिन…..टन…..! मालिनी ने उस खिलौने को उठाया | और उसकी चाबी बंद करी | खिलौने को किनारे रखकर मालिनी ने ऊपर वाले कमरें में जाने के लिए जैसे ही पहली सीढ़ी पर कदम रखा | ऊपर से एक बॉल गिरते हुए नीचे आई !

टक….टिक…..टक…..टिक……! ये बॉल उसके पैरों के पास पहुँची | और साथ ही उसके कानों में आवाज – तलो थेले………………………!

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शेखर घर पहुँचा | तो मालिनी सीढ़ीयों के पास बेहोश पड़ी थी | उसकी लाख कोशिशों के बाद भी जब मालिनी को होश नहीं आया | तो शेखर ने उसे उठाया और कमरें के अन्दर चला गया | शेखर उसे जगाने की कोशिश कर ही रहा था | कि अचानक – तलो ना थेलते हैं………….!

शेखर की हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी थी | ना ही गुस्सा कर पा रहा था | और ना ही अपने गुस्से को रोक पा रहा था | उसने गेंद उठाई और सीधा खिड़की से बाहर फेंक दिया | गेंद बाहर फेंकते ही मालिनी को धीरे – धीरे होश आने लगा था |

होश में आ चुकी मालिनी के लिए पानी लेने शेखर नीचे गया | पानी लेकर शेखर ऊपर जा ही रहा था | कि पलट कर ज़ोर से चीखा | नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! मैं तुम्हारें साथ ! बचपन से खेलते – खेलते परेशान हो गया हूँ | क्यों मेरा पीछा नहीं छोड़ते ? मुझे छोड़ दो ! सुबह – शाम रात कभी तो मुझे अकेला छोड़ो ! कभी तो मुझे अकेला छोड़ो !

चीख पुकार सुनकर – मालिनी दौड़ी – दौड़ी बाहर आयी | और शेखर से उसके चिल्लाने का कारण पूछते हुए सीढ़ीयों से उतर ही रही थी | कि अचानक कैसे उसके कदम फिसले और……………….! टिन…टन……..टिन…..टन…टिन…..टन…..!

टीं……टीं………टीं…..टीं………! मालिनी की आँख खुली तो वो अस्पताल में थी | सामने था एक बुरा सच | कि मालिनी के मां बनने का सपना टूट चुका था |

मालिनी को अपने सारे सवालों के जवाब मिल गए थे | कि क्यों और किस पर शेखर उस दिन चिल्लाकर कह रहा था – नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! नहीं खेल सकता ! मैं तुम्हारें साथ ! बचपन से खेलते – खेलते परेशान हो गया हूँ | क्यों मेरा पीछा नहीं छोड़ते ? मुझे छोड़ दो ! सुबह – शाम रात कभी तो मुझे अकेला छोड़ो ! कभी तो मुझे अकेला छोड़ो !

दरअसल शेखर का एक छोटा भाई भी था | जिसकी मौत तब हुई जब वो सिर्फ़ 3 साल का था | प्लास्टिक की गेंद से खेलते – खेलते उसके पैर छत से फिसले और वो सीधा नीचे जा गिरा ! शेखर को उसका ये भाई बहुत दिनों तक दिखाई दिया |

शेखर ने इसका जिक्र अपने घरवालों से, अपने दोस्तों से किया | तो लोग उसे उसका पागलपन या वहम कहते ! कभी बार तो डॉक्टर को भी दिखाया | लेकिन शेखर की इस परेशानी का हल उसे नहीं मिला | आगे चलकर शेखर इन सब चीजों का आदि हो गया |

और क्योंकि शेखर के उस छोटे भाई ने कभी भी शेखर को नुकसान नहीं पहुँचाया था | इसलिए उसने उसका जिक्र लोगों के सामने करना बंद कर दिया | ये बात शेखर ने मालिनी को भी बता रखी थी | पर शेखर का वो छोटा भाई इस तरह से वापिस आएगा उनकी जिंदगी में | ये उन्हें नहीं मालूम था |

तब जब मालिनी की कोख में एक नई जिंदगी थी | आज इस बात को करीबन 2 साल हो चुके हैं | मालिनी और शेखर की एक बेटी भी हैं | लेकिन आज भी मालिनी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उस पुराने घर में बिताए गए | आखिरी एक हफ्ते को भुला नहीं पाई हैं |

उस घर में बिताए आखिरी हफ्ते की सिर्फ़ एक बात मालिनी को आजताज याद हैं – भा……..भी….! ओ ! भा………भी……..! इस घर में सब……….से छोटा मैं हूँ ! मुझ……से छो………..टा……! कोई नहीं आएगा !

 

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन 1  एपिसोड 6

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

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