पुष्कर और निहार की डरावनी कहानी

पुष्कर और निहार की डरावनी कहानी

एक कहानी ऐसी भी | सीजन1  एपिसोड 5

Credit : 93.5 Red FM India

दो दोस्तों की कहानी, दोस्ती के गाने और मोहब्बत | ये सारी बातें सुनने में कितनी अच्छी लगती हैं | पर आज जिन दो दोस्तों की कहानी हम आपको सुनाने जा रहे हैं | कहीं ऐसा ही कोई दोस्त आपका भी तो नहीं !

हर दिन की तरह पुष्कर आज भी डिनर ब्रेक के दौरान अपने ऑफिस की वर्कस्टेशन से अपने रायपुर के करीबी दोस्त निहार से वीडियों चैट कर रहा था | हर दिन की तरह उन दोनों की बातें | बातें भी नॉर्मल थी | और बातों ही बातों में निहार ने पुष्कर से पूछा – यार तेरे बगल में बैठकर जो तेरा यार काम करता हैं | क्या आज वो ऑफिस नहीं आया ?

निहार का ये सवाल पुष्कर को बड़ा अजीब लगा | उसने निहार से पूछा – यार तू किसकी बात कर रहा हैं ? निहार ने पुष्कर को बताया कि वही आदमी जो व्हाइट शर्ट पहनकर हर दिन तेरे बगल में बैठता हैं | बड़ी अजीब तरीके से घूरता हैं यार | पता नहीं इतना क्या इंटरेस्ट है उसको हम दोनों की बातें सुनने का !

पुष्कर ने निहार की बातों को सीरियसली नहीं लिया | क्योंकि निहार की बचपन से ही आदत थी | पुष्कर को अजीबों – गरीब इधर – उधर की बातें सुनाकर डराने की | जिसकी पुष्कर को अब आदत हो चुकी थी | पुष्कर ने निहार से कहा – मजाक बंद कर यार |

लेकिन निहार उसे उल्टे आँखे दिखाते हुए कहता है कि वो इस बार पुष्कर के साथ कोई गंदा मजाक नहीं कर रहा हैं | और ना ही उसे डराने की कोशिश कर रहा हैं | वो असलियत में जानना चाहता है कि वो इंसान आखिर है कौन ?

जिसे वो हर दिन पुष्कर के साथ वीडियों चैट करते हुए देखता हैं | निहार ने पुष्कर को उस आदमी का हुलिया भी बताया | घुंघराले बाल, काली मूंछे, रंग गोरा और हाथ में सोने की एक ब्रेसलेट हैं | पुष्कर ने भूत – प्रेत की कहानियाँ बहुत सुनी थी | और ये भी सुना था कि आत्माएँ हमारे आस – पास भटकती हैं |

लेकिन हम शायद उन्हें देख नहीं पाते | पुष्कर जहाँ बैठता था | उसके अगल – बगल सिर्फ़ लड़कियाँ ही बैठती थी | और अगर निहार के बताए हुए हुलिए की बात करें | तो घुंघराले बालों वाला शायद ही कोई पुष्कर के ऑफिस में काम करता था | तो निहार किसकी बात करा रहा था ?

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पुष्कर के दोस्त निहार ने उसे बताया कि उसके साथ वीडियों चैट में वो एक ऐसे इंसान को देखता हैं | जो बहुत ही अजीब तरीके से उसे घूरता रहता हैं | पुष्कर ने बताया कि यार ऐसा कोई भी इंसान उसके अगल – बगल में नहीं बैठता | और ना ही पूरी ऑफिस में ऐसा कोई हैं ?

पुष्कर निहार से बात कर ही रहा था कि अचानक एक जोरदार आवाज ने उसका ध्यान खींच लिया | कमरें की सारी बत्तियाँ गुल हो गई थी | पुष्कर ने कहा – निहार तू यही रुक मैं 2 मिनट में वापस आया | बाहर जाने पर पता लगा कि ट्रांसफ़ॉर्मर में आग लगने से सारे इलाके की बत्ती गुल हो गई हैं |

पुष्कर का कम्प्युटर UPS की बदौलत अभी भी चल रहा था | वो जब वापस अन्दर गया | तो ये देखकर हैरान था कि निहार किसी से हंस – हंस कर बात कर रहा था | हा………..हा …………..हा………..हा…..!

पुष्कर ने कहा कि तू पागल हो गया है क्या ? किससे बाते कर रहा था ? निहार ने बताया कि वो उसी आदमी से बात कर रहा था | जिसका जिक्र उसने थोड़ी देर पहले किया था | पुष्कर ने अपने अगल – बगल देखा | पर उसे कोई नजर नहीं आया |

उसने कहा – यार मज़ाक बंद कर निहार | पर निहार ने एक बार फिर कहा – कि वो कोई मजाक नहीं कर रहा हैं | और वो आदमी जिससे निहार बाते कर रहा था | वो आदमी पुष्कर के ठीक पीछे खड़ा हैं | इतना कहने के साथ ही पुष्कर का कम्प्यूटर जो अब तक UPS की बदौलत चल रहा था | वो भी बंद हो गया |

पुष्कर की हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि वो अपने पीछे घूमकर देखे | पूरे कमरें में शांति थी | तभी उस शांति को भंग करते हुए पुष्कर का फोन बजा ! टिली……लिली……..टिली……..लिली………..टिली….लिली…!

पुष्कर की धड़कने तेज हो गयी थी | उस एक फोन रिंग से | शायद जिंदगी में पहली बार एक फोन रिंग से वो इतना डरा होगा | फोन निहार का ही था | लेकिन पुष्कर ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया | एक बार फिर कमरें में पहले के जैसी ही शांति छा गई |

लेकिन ठीक 10 से 15 सेकंड बाद………….. टिली……लिली……..टिली……..लिली………..टिली….लिली…! पुष्कर का फोन बजा | जो लगातार बजता ही रहा | अंततः परेशान होकर पुष्कर ने फोन उठा ही लिया | निहार ने कहा यार तू चुपचाप मॉनिटर के सामने क्यों बैठा हैं ?

बात क्यों नहीं कर रहा ? लगता है तू मुझे देख नहीं पा रहा हैं | पुष्कर ने कहा – क्या बकवास की बात कर रहा हैं ? मेरा कम्प्यूटर बंद पड़ा हैं | सुनकर निहार ने कहा – ठीक से चेक कर क्योंकि मैं तो तुझे देख पा रहा हूँ |

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बत्ती गुल हो जाने के कारण ! पुष्कर का कम्प्यूटर जो UPS पर चल रहा था | वो अचानक बंद पड़ जाता हैं | पुष्कर के दोस्त निहार ने उसे फोन करा | और कहा – यार तू वीडियों चैट पर बोल क्यों नहीं रहा हैं | ऐसे कम्प्यूटर के सामने क्यों बैठा हुआ हैं ?

पुष्कर ने बताया कि कम्प्यूटर तो बंद पड़ा हैं | ना बत्ती हैं ना ही UPS में बैट्री हैं | तू मुझे देखेगा कैसे भाई ? निहार की हंसी छूट पड़ी | बड़ा आया हीरो बनने | मुझे मालूम हैं बोस अन्दर ही अन्दर तेरी हालत बहुत खराब हो चुकी है |

पुष्कर का कमज़ोर दिल सही मायनों में अन्दर तक सहम गया था | जब उसे पता चला कि वीडियों चैट के दौरान उसके रायपुर में रहने वाले दोस्त निहार को हर दिन पुष्कर के बगल में एक ऐसा इंसान दिखाई देता हैं | जो हकीकत में है ही नहीं |

उस दिन पुष्कर अपने ऑफिस में और काम नहीं कर पाया | हर रोज की तरह ना ही अपने दोस्तों से मिला और ना ही किसी ढ़ाबे पर बैठकर गप्पे मारे | वो गाँव की कड़कती ठण्ड में उसके पसीने छूट रहे थे | वो इस कश्मकश वाली परिस्थिति में रायपुर अपनी मां को फोन लगाता हैं |

परन्तु किसी कारणवश उसके फोन का उसे कोई जवाब नहीं मिला | निहार की बताई हुई बातें और उस इंसान का हुलिया याद कर सारी रात पुष्कर की आँखों से नींद गायब थी | उसका डर उस पर हावी हो चुका था | किसी तरह आज की ये भयानक रात गुजरी |

और सुबह जब उसकी आँख खुली तो उसने पाया | कि कल रात वो सोफे पर ही लेट गया था | और उसके हाथ में लोहे का एक सामान था | उसे बचपन में मां की कही हुई एक बात याद आ गई | पुष्कर की मां कहा करती थी | कि जब भी कभी कोई डर या भय सताए तो हाथ में लोहे का कोई सामान ले लो |

शायद बीती रात पुष्कर इतना ही डर गया था | कि उसने लोहे का कोई सामान लिया | लेकिन उसे ये बिल्कुल भी याद नहीं कब, कहाँ और कैसे ? पुष्कर ने अपना होश संभाला | और ऑफिस के लिए तैयार होने लगा | आज ऑफिस पहुँचने में उसे थोड़ी लेट होने वाली थी | क्योंकि आँख खुलते – खुलते समय काफी समय निकल गया था |

अपने ऑफिस के लिफ्ट में भीड़ होने के बावजूद पुष्कर को एक अजीब सा डर लग रहा था | उसे बड़ी घुटन महसूस हो रही थी | और ऐसा लग रहा था जैसे कोई बार – बार उसके कान के पास आकर उसका नाम ले रहा हो | पुष्क……….र.र.र.र.र..र…….! पुष्क………. र.र.र.र.र..र…….! पुष्क……… र.र.र.र.र..र…….!

एक ठंडी हवा को वो अपने कंधे पर महसूस कर रहा था | मानो कोई जानबूझकर अपनी सांसे उसके कंधे पर छोड़ रहा हो | जबकि पुष्कर लिफ्ट की दीवार से एकदम कोने में सटकर खड़ा था |

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सोते – जागते उठते – बैठते पुष्कर को अजीबो – गरीब आवाजें सुनाई देती | पुष्क……….र.र.र.र.र..र…….!

मानों कोई उसे बुला रहा हो | रात को अचानक उसे अपने घर में ऐसी आवाजें सुनाई देती | जैसे कोई किचन में काम कर रहा हो | फ्रिज का दरवाजा खुला पड़ा था | और जिन बोतलों में उसने पानी भरकर रखा था | वो आधी खाली पड़ी थी |

टिन………..न…….न……….टिन…………..न…..न……..न.! रात करीबन 2 बजे पुष्कर के फ़्लैट की डोर बेल बजी | टिन………..न…….न……….टिन…………..न…..न……..न.! उसने आधी नींद में ही हिम्मत जुटाई और दरवाजा खोला !

परन्तु वहाँ कोई भी नहीं था | उसे लगा कि शायद उसके ही सुनने में गलती हुई होगी | दरवाजा बंद कर जैसे ही पुष्कर पल्टा कि एक बार फिर टिन………..न…….न……….टिन…………..न…..न……..न.! पुष्कर ने आई होल से देखा तो उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था |

दरवाजें के उस पार उसका दोस्त निहार खड़ा था | पुष्कर आई होल से उसे देखे ही जा रहा था कि तभी निहार ने दरवाजें पर हाथ से ज़ोरदार प्रहार किया | हड़बड़ी में पुष्कर ने दरवाजा खोला | सामने निहार खड़ा था जिसकी हंसी का ठिकाना नहीं था |

क्योंकि एक बार फिर पुष्कर उसके मजाक का शिकार बन गया था | निहार और पुष्कर रात को जागकर बात कर रहे थे | पर थकान इतनी ज्यादा थी कि कुछ ही देर में गहरी नींद में सो गए | करीबन 15 मिनट के बाद निहार की नींद एक अजीब सी आवाज से टूटी |

निहार ने पुष्कर को नींद से उठाया और दोनों दबे पाँव किचन की ओर गए | फ्रिज का दरवाजा खुला पड़ा था | और पानी की भरी हुई बोतलें आधी खाली पड़ी थी | सबसे आश्चर्यजनक बात ये थी कि वो दोनों किचन के सामने ही खड़े थे | और वो आवाजें स्पष्ट सुन पा रहे थे |

परन्तु ना तो कोई बर्तन हिल रहा था | और ना ही वहाँ उन्हें कोई दिखाई दे रहा था | सुबह की पहली किरण के साथ वो दोनों वहाँ से ट्रेन पकड़कर रायपुर के लिए रवाना हो गए | दोनों रायपुर स्टेशन पर रिक्शे की खोज में थे | तभी पुष्कर को सामने पान की दुकान पर एक आदमी दिखाई दिया |

जिसके बाल घुंघराले, सफेद शर्ट, हाथ में सोने की ब्रेसलेट और तो और उसकी मूंछे भी थी | पुष्कर ने पहली बार उस आदमी को साक्षात अपने सामने देखा था | जो निहार को रोज वीडियो चैट के समय दिखाई देता था | वो आदमी पुष्कर को देखकर अजीब तरीकें से हंसे जा रहा था |

पुष्कर ने कहा – निहार यही है ना वो आदमी जो तुम्हें रोज वीडियों चैट के समय दिखाई देता था | निहार ने कहा – तुझे अभी भी याद है वो आदमी | वो तो मैं मजाक – मजाक में यूं ही कहा करता था |

कई बार कुछ झूठ इतने बड़े होते हैं | कि वो हकीकत को छोटा कर देते हैं !

 

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन1  एपिसोड 5

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

रात सावन ऑडिटोरियम में, भूत की कहानी

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