कहा था न गाड़ी..... मत रोकना ! भूतनी की कहानी

विजय और संगीता

कहा था न गाड़ी….. मत रोकना !

एक कहानी ऐसी भी | सीजन1  एपिसोड 8

Credit : 93.5 Red FM India


विजय और संगीता दोनों ने सिर्फ़ दो दिनों की छुट्टी के लिए इतने कपड़े पैक कर लिए थे | मानों वो सप्ताह भर कही छुट्टी मनाने जा रहे थे | दोनों की शादी को 4 महीनें बीत चुके थे | परन्तु दोनों काम में इतने व्यस्त थे | कि हनीमून पर नहीं जा पाए |

समय हाथ में बहुत कम था | इसलिए विजय ने दिल्ली शहर से थोड़ी दूरी पर एक रिजोर्ट में बुकिंग कराई | ताकि आने – जाने में समय बर्बाद नहीं होगा | आज जरूरत से ज्यादा ही ट्रेफिक का सामना करना पड़ रहा था | परन्तु एक बार जब गाड़ी ने नेशनल हाइवे पकड़ी |

फिर वो हवा से बातें कर रही थी | गाड़ी के अन्दर हीटर होने के कारण दोनों को बाहर पड़ रही ठण्ड का कोई अंदाजा ही नहीं था | गाड़ी की रफ़्तार उस हाइवे पर अचानक से धीमी पड़ गई | विजय के एक्सीलेटर दबाने के बावजूद गाड़ी की रफ़्तार में कोई बदलाव नही आया और गाड़ी बंद पड़ गई |

गाड़ी का दरवाजा खोल जैसे ही विजय ने बाहर कदम रखा | उसे बाहर पड़ रही कड़ाके की ठंड का एहसास हुआ | एक अजीब सी चुभन थी इस ठंड में | सुनसान सड़क पर गाड़ी ख़राब हो जाने से संगीता थोड़ा घबरा गई थी | विजय ने उसका होंसला बढ़ाया और कहा – तुम चिंता मत करो ! मैं अभी गाड़ी ठीक कर दूंगा |

गाड़ी का इंजन बहुत गर्म हो चुका था | उससे निकलता धुँआ | नेशनल हाइवे की उस सुनसान सड़क पर भय का माहौल तैयार कर रही थी | विजय ने पानी का जेरेकन निकालने के लिए गाड़ी की डिक्की खोली | तभी उसकी गाड़ी का हॉर्न बज उठा !

पी……पी……………पी !

सोचने वाली बात ये है कि विजय और संगीता दोनों ही गाड़ी के बाहर थे | तो हॉर्न कैसे बजा | गाड़ी ख़राब हो गई थी | इसलिए इसे ज्यादा तवज्जो ना देते हुए | विजय ने कार्बोरेटर में पानी डाला | और करीबन 10 मिनट बाद विजय ने गाड़ी शुरू की |

गाड़ी शुरू हुई और साथ ही शीशे पर एक दस्तक……………….! ठक……ठक…….ठक !

शीशा नीचे किया तो एक लड़की थी वहाँ | जो कह रही थी – विजय मेरे पीछे कुछ गुंडे पड़े हैं | जो मुझे मारना चाहते हैं | मुझे प्लीज अपने साथ ले चलिए | और आगे कहीं भी बीच रास्ते में उतार दीजिएगा | विजय और संगीता ने उसे लिफ्ट तो दे दी |

पर 5 मिनट ही बीते होंगे | कि संगीता के दिमाग में एक सवाल उठा | कि कैसे एक अनजान लड़की उसके पति का नाम लेते हुए कहती हैं कि विजय…….विजय ! मेरे पीछे कुछ गुंडे पड़े हैं !

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नेशनल हाइवे पर पहले तो गाड़ी ख़राब हो जाना | और उसके बाद एक अनजान लड़की का विजय और संगीता से लिफ्ट मांगना | 5 मिनट पहले घटी घटना पर जब संगीता का ध्यान गया | तो वो आश्चर्य में पड़ गई | कि कैसे एक अनजान लड़की ने उनसे लिफ्ट मांगते वक्त कहा कि विजय…….विजय ! मेरे पीछे कुछ गुंडे पड़े हैं !

डरी हुई संगीता ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा | तो उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था | थोड़ी देर पहले उन्होंने जिस लड़की को अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी थी | वो उस गाड़ी में नजर ही नहीं आ रही थी | संगीता ने जैसे ही गाड़ी रोकने के लिए विजय से कहा | कि तभी अचानक एक आव़ाज आई |

गा……….ड़ी…….! रो…..की…….! तो… अच्…..छा…… नहीं…….होगा……..!

ये आवाज दोनों ने स्पष्ट रूप से सुनी थी | संगीता पर न जाने कैसा भूत सवार था ? उसने बोल – बोल कर विजय को गाड़ी रोकने के लिए मजबूर कर दिया | जैसे ही गाड़ी रुकी एक आव़ाज संगीता के कानों से टकराई !

गा……….ड़ी…….! रो…..क…कर….तुमने… अच् …..नहीं….. किया !

एक अजीब सी शांति थी उस गाड़ी के अन्दर | विजय और संगीता दोनों एक दूसरे का मुंह देख रहे थे | क्योंकि दोनों को समझ नहीं आ रहा था | कि पिछले 10 मिनटों में उनके साथ हुआ क्या था ?

जो कुछ भी घटा था | वो सच था या उनका वहम | कई सवाल लिए विजय गाड़ी से नीचे उतरा | और साथ – साथ संगीता भी | गाड़ी से नीचे उतरकर जी नजारा देखा | वो उन्हें यकीन नहीं हो रहा था | ये वहीँ जगह थी जहाँ करीबन 15 मिनट पहले उन्होंने उस लड़की को लिफ्ट दी थी |

इसका मतलब ये है कि पिछले 15 मिनटों में उनके साथ जो कुछ भी घटा | वो यही घटा था | और गाड़ी 80-90 की स्पीड में होने के बावजूद यहाँ से एक इंच आगे भी नहीं हिली थी | विजय और संगीता इससे पहले कि कुछ समझ पाते एक बार से चौंक चुके थे एक आवाज सुनकर !

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अगर आपकी आँखों के सामने से कोई गायब हो जाए तो ? कुछ ऐसा ही हुआ विजय और संगीता के साथ !

जिन्होंने एक लड़की को अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी थी | जो अचानक से गायब हो गई और फिर गाड़ी में एक आवाज आती हैं ! गा……….ड़ी…….! रो…..की…….! तो… अच्…..छा…… नहीं…….होगा……..!

पिछले 15 मिनटों से गाड़ी एक ही जगह खड़ी थी | विजय और संगीता गाड़ी से बाहर निकलकर खड़े थे | कि तभी अचानक एक ज़ोरदार आवाज आई ! जो उनके बगल से गुजरते ट्रक के हॉर्न की थी | ट्रक के हॉर्न ने मानों विजय और संगीता के किसी बुरे सपने को तोड़ दिया |

दोनों तुरंत अपनी गाड़ी में बैठे और वापस अपने घर दिल्ली की ओर चल दिए | रविवार की रात बहुत लम्बी थी विजय और संगीता के लिए | शाम से ही बत्ती गुल थी | पर सर्दी का मौसम होने के कारण ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी | दोनों गहरी नींद में सो रहे थे | कि तभी अचानक उनके रसोईघर से एक आव़ाज आई |

तडाक…………. ( कुछ टूटने की आवाज ) !

संगीता ने मोमबत्ती जलाई और उठकर रसोईघर गई | नजारा देखने लायक था | रात को धोकर रखे हुए बर्तन फर्श पर बिखरे पड़े थे | मोमबत्ती की उस रोशनी में बर्तन उठाने के लिए संगीता जैसे ही झुकी | उसे ऐसा प्रतीत हुआ | जैसे मानों किसी ने उसे पीछे से छुआ हो !

उसने तुरंत पलटकर देखा | परन्तु वहाँ पर कोई नहीं था | अपने ही घर में संगीता को एक अजीब सा डर लग रहा था | संगीता धीरे – धीरे सहमें हुए क़दमों से अपने कमरें की ओर जा रही थी | और डायनिंग हॉल पार करते वक्त डायनिंग हॉल की लाईट जली और फिर बुझ गई |

शायद शाम से गुल बत्ती एक क्षण के लिए वापस आकर चली गई | परन्तु पहले से ही डरी हुई संगीता के लिए इस घटना के कुछ और ही मायने थे | उसने कमरें में प्रवेश कर मोमबत्ती बुझाई और सोने का प्रयास करने लगी | और 10-15 मिनट में ही उसे नींद आ गई | और फिर वो चीखते हुए वो उठ गई |

आ………………………………………..!

नींद टूटने का कारण ये था कि संगीता अपने शरीर पर एक अजीब से दबाव को महसूस कर पा रही थी | और आँख खुलने पर उसने अपनी के ठीक 2 इंच ऊपर से दो आँखों को उसे घूरता हुआ पाया |

खुले बाल और होठों पर मुस्कुराहट के साथ वहीँ बात कहा था न – गा……….ड़ी…….! म….त……. रो…..क……ना…….!

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विजय और संगीता के साथ घटी थी एक घटना | जहाँ उन्होंने एक लड़की को अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी थी | जो कुछ देर के बाद ही उनकी गाड़ी से गायब हो गई | कुछ बाकी थी तो सिर्फ़ उसकी आवाज …. गा……….ड़ी…….! रो…..की…….! तो… अच्…..छा…… नहीं…….होगा……..!

संगीता के कहने पर विजय ने गाड़ी रोकी और उसके बाद उनके साथ जो हुआ | वो कभी सोच भी नहीं सकते थे | संगीता को वो औरत कहीं भी | दिन में या रात में दिखाई देती और परेशान करती | तंग आकर दोनों ने घर बदल लिया |

और घर बदलते के साथ ही ये सारी घटनाएँ उन दोनों के साथ बंद हो गई | इन सारी बातों को 2 साल हो गए थे | संगीता और विजय का अब एक साल का बेटा भी था | एक दिन ब्रेकफ़ास्ट टेबल पर विजय बैठा था | तो संगीता ने कहा – अरे वाह ! आज तो कमाल ही हो गया |

आज लाड साहब खुद ही तैयार होकर बैठ गए | मुझे कपड़े भी नहीं निकाल कर देने पड़े | विजय ने हंसते – हंसते कहा – हाँ – हाँ, तुमने नहीं किया तो क्या ? उस गाड़ी वाली भूतनी ने करके दे दिया | इसके पहले की संगीता विजय की बातों पर रीएक्ट करती |

कमरें से उसके बच्चे बच्चे की ज़ोर – ज़ोर से रोने की आवाज आने लगी | विजय ने अन्दर जाकर देखा | तो पाया कि उसका बेटा बिस्तर पर लेटा हुआ रो रहा था | उसने संगीता को चिल्लाते हुए आवाज लगाईं और फिर कहा कि तुम इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हो ? कि बच्चे को पालने की जगह बेड पर सुला दिया |

संगीता ने कहा – पर मैं तो उसे पालने में ही सुलाकर गई थी ! सुनकर विजय ने कहा – तो क्या उस गाड़ी वाली उस भूतनी ने उसे यहाँ सुला दिया | बात आई – गई हो गयी | रात का समय था | संगीता लेटे – लेटे अपने बांये हाथ से अपने बेटे के पालने को झुला रही थी |

कि तभी अचानक अंधेरे में उस पालने को दूसरी तरफ से भी कोई खींचने लगा ! अंधेरे में संगीता ने अपनी गर्दन बायीं तरफ घुमाई | तो वहाँ उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया | परन्तु इस वक्त उसके दायें कंधे पर कोई अपनी सांसे छोड़ रहा था !

पलटकर देखा तो वहीँ मुस्कुराता हुआ चेहरा ! और फिर से वही बात – गा……….ड़ी…….! म….त……. रो…..क……ना…….!

आ………………………………………!

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

और अगली बार से हाइवे पर किसी के लिए भी अपनी गाड़ी मत रोकना !

 

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन1  एपिसोड 8

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

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