राजा और 4 रानियों की कहानी | मोटिवेशनल कहानी

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राजा और 4 रानियों की कहानी | मोटिवेशनल कहानी

जिंदगी की परीक्षा में कभी नंबर नहीं मिलते | इसीलिए जब लोग आपको दिल में जगह दे दे तो समझ लीजिएगा पास हो गए आप |

ये कहानी है एक राजा की हैं | जिसके पास बड़ा सा साम्राज्य था | उसके पास एक विशाल सेना भी थी | लेकिन समस्या ये थी कि उम्र के आखिरी पड़ाव में था और वो अब बूढ़ा हो चुका था | वह बीमार रहने लगा था | समस्या उत्तराधिकारी की नहीं थी | क्योंकि उत्तराधिकारी का चुनाव तो कर लिया गया था | जिसमें बड़े बेटे को राजा घोषित कर दिया गया था |

लेकिन राज वैध ने कहा था कि आपके पास समय बहुत कम बचा हैं | आपकी मृत्यु कभी – भी हो सकती है | ये जो आखिरी दिन बचे हैं | इनको ऊपर वाले की भक्ति में लगाइए | और जाइए जाकर के सन्यास में समय बिताइए |

उसकी 4 रानियाँ थी | वह चौथी रानी से बेइंतहा प्यार करता था | और आखिरी के दिनों में उस रानी के साथ रहना चाहता था |

राजा उस रानी के महल में पहुँचा और कहा – रानी, क्या आप मेरे साथ चलने के लिए तैयार हैं ? मेरी जिंदगी का आखिरी समय चल रहा हैं | मेरे पास में बहुत कम समय बचा हैं | आखिरी के कुछ दिन ही बचे हैं | क्या आप मेरे साथ जंगल में तपस्या और सन्यास के लिए चलेंगी ? उन आखिरी के दिनों में मैं आपके साथ रहना चाहता हूँ |

उसने बड़ी शिद्दत से रानी से विनती की | लेकिन रानी ने साफ़ मना कर दिया और कहा – अगर आपको राजमहल में रहना है तो रहिए | वर्ना मैं आपके साथ नहीं चल सकती हूँ | राजा मायूस और उदास होकर के वहाँ से लौटा | और अब बारी थी तीसरी रानी के राजमहल में जाने की |

तीसरी रानी के कक्ष में पहुँचा और तीसरी रानी के कक्ष में पहुँचकर भी यही बात कही | कि क्या आप मेरे साथ सन्यास के दिनों में चलने के लिए तैयार हैं | अब मैं जंगल में जाना चाहता हूँ | राजपाठ को छोड़ना चाहता हूँ | ये आखिरी का वक्त हैं | क्या आप मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं ?

तीसरी रानी ने भी साफ़ – साफ मना कर दिया और कहा कि अगर आप चले गए | तो मैं दूसरी शादी कर लूंगी | राजा वहाँ से भी उदास और मायूस होकर के लौट रहा था | सोच रहा था कि इन दोनों रानियों से मैंने बहुत प्यार किया और लेकिन इन्होंने मेरा साथ नहीं दिया |

अब बारी थी दूसरी रानी की | जब उनके राजमहल में पहुँचा और उनके कक्ष में पहुँचा | तो सोच रहा था कि ये तो बड़ी बुद्धिमान हैं | दरअसल ये जो दूसरी रानी थी | वो राजा के हर फैसलें में मदद करती थी | उनको बताती थी कि ये गलत है, ये सही हैं | आपको ये करना चाहिए, आपको वो करना चाहिए | उनकी गलतियों को सही करवाया करती थी |

वो बहुत बुद्धिमान थी | हर राजनितिक फैसलों में राजा का साथ देती थी | दूसरी रानी के पास बड़ी उम्मीद से गया और जाकर के कहा – मैं आपसे प्यार करता हूँ | मोहब्बत बाकी हैं | रानी ने कहा – हमें मालूम है कि आप हमसे प्यार करते हैं | बताइए क्या कहना चाहते हैं आप ?

तो राजा ने कहा – कि मैं राज – पाठ छोड़ने वाला हूँ और उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है | राजा का चुनाव कर दिया गया हैं | बड़े बेटे को राजा बना दिया हैं | अब मैं आखिरी के दिनों में हूँ | मैं जंगल में जाकर सन्यास लेना चाहता हूँ | तपस्या करना चाहता हूँ | क्या आप मेरे साथ में चलने के लिए तैयार हैं ?

दूसरी रानी ने कहा – नहीं, मैंने आपका हर कदम पर साथ दिया हैं और हर फैसलें में साथ दिया हैं | आपको समझाया बताया | लेकिन इस फैसलें में साथ नहीं दे पाउंगी | हाँ, एक काम कर सकती हूँ क्योंकि आपसे मोहब्बत करती हूँ | जब आपका आखिरी वक्त आ जाएगा |

जब आप इस दुनिया को छोड़कर चले जाएंगे | तब आपका अन्तिम संस्कार करवा दूंगी | सारी व्यवस्था करवा दूंगी | आप चिंता मत कीजिएगा | शाही अंदाज में आपको अलविदा किया जाएगा | दूसरी रानी जब ये कह रही थी | तो राजा मन ही मन रो रहा था कि ये क्या हो रहा हैं ?

दूसरी रानी ने भी मना कर दिया था | उसका मुंह लटका हुआ था | तभी एक आवाज आई | कि राजा साहब मैं आपके साथ चलने के लिए तैयार हूँ | आप जहाँ कहेंगे वहाँ चलने के लिए तैयार हूँ | अंतिम वक्त में आपका साथ देने के लिए तैयार हूँ |

राजा ने मुंह उठाकर के देखा | तो उस राजमहल के दरवाजें पर वो रानी खड़ी थी | जिसके दरवाजें पर अभी तक ये गया नहीं था, जिससे जाकर के कहा नहीं था | कमज़ोर हो चुकी थी पहली रानी | राजा की पहली पत्नी | जिससे राजा ने कभी प्यार ही नहीं किया | उसकी देखभाल ही नहीं की |

राजा को मन ही मन लगा कि मैं सोच रहा – सही सोच रहा था | राजा को लग रहा था | कि शायद पहली रानी होगी, जो हाँ कहेगी | और पहली रानी ने आकर के कहा – बताइए कहाँ चलना हैं ? आपके आखिरी दिनों में, आखिरी वक्त में मैं आपका साथ दूंगी |

राजा माफ़ी मांगने लगा, गिड़गिड़ाने लगा | कि मैंने आपको बहुत सारा प्यार करना चाहिए था | लेकिन मैं आखिरी दिनों में आपकी उपेक्षा ( Neglect ) कर रहा था | मैंने आपकी देखभाल नहीं की | मैंने आपसे प्यार नहीं किया | रानी ने माफ़ कर दिया और बोली – चलिए आपके आखिरी दिनों में आपके साथ चलने के लिए तैयार हूँ |

ये कहानी राजा और 4 रानियों की नहीं हैं | ये कहानी मेरी, आपकी और हम सब की हैं | ये कहानी हम सब की हैं क्योंकि ये राजा और रानी की कहानी नहीं हैं |

ये 4 रानियों की कहानी हैं | चौथी रानी यानि कि आपका शरीर आपकी बॉडी | जिसका आप बड़ा ख्याल रखते हैं | जिसको आप बड़ा सजा संवार के रखते हैं | लेकिन ये आपका साथ नहीं देने वाली हैं |

तीसरी रानी यानि कि मैटेलेस्टिक चीजें जैसे – मोबाईल, लैपटॉप, गाड़ी, बंगला, घड़ी, कपड़े और बहुत सारी चीजें | जिनके बारें में हम दिनभर भागते रहते हैं | कोशिश करते रहते हैं उनको पाने की | लेकिन आप कहानी को याद कीजिए | उस तीसरी रानी ने कहा था कि मैं दूसरी शादी कर लूंगी | मैं फिर से शादी कर लूंगी यानि कि ये चीजें किसी और की हो जाएगी | ये चीजें हमेशा आपकी नहीं रहने वाली |

दूसरी रानी यानि कि आपका परिवार, आपके दोस्त और आपके रिश्तेदार | दूसरी रानी ने क्या कहा था ? दूसरी रानी ने कहा था कि आपका अंतिम संस्कार करवा दूंगी | अंतिम संस्कार तक आपका साथ दे दूंगी | सारी व्यवस्था करवा दूंगी | जो आपके सगे – संबंधी होते हैं | जो आपका प्यार होते हैं | चाहकर भी आपके साथ नहीं जा पाते | वो अंतिम संस्कार तक ही आपका साथ दे सकते हैं | वो भी आपके साथ नहीं जा पाते हैं |

पहनी पत्नी जिसका आपने कभी ध्यान नहीं रखा | जिसकी कभी देखभाल नहीं की, कभी प्यार नहीं किया, भूल गए | क्योंकि आपको फ्री में मिली हैं | पहली पत्नी यानि कि आपकी आत्मा | जिसका आपको सबसे ज्यादा ख्याल रखना था | जिसका आपने ख्याल नहीं रखा | वो हमेशा आपके साथ रहती | जब आप जाएंगे | आपके अंतिम पलों में भी आपके साथ चली जाएगी | लेकिन चूंकि हमें फ्री में मिली हैं | हमने उसकी कभी कद्र ही नही की |

जो चीज इंसान को फ्री में मिलती हैं | इंसान उसकी कभी कद्र ही नहीं करता हैं | हम ये सोचकर के आये हैं कि ये तो हमारे साथ है ही | इसकी क्या कद्र करनी | क्या ख्याल रखना | आप देखिएगा कि आपने अपने जीवन में जब भी महत्वपूर्ण फैसले लिए थे | आपकी अंतरात्मा की जो आवाज हैं | आपकी आत्मा की आव़ाज है उसने आपका साथ दिया था |

काफी लोग कहते हैं कि मोटिवेशन की जरूरत होती हैं | लेकिन वास्तविक मोटिवेशन आपके अंदर से आता हैं | कि कर दिखाओ कुछ ऐसा कि दुनिया करना चाहें आपके जैसा | वो आव़ाज आपको सुननी होती हैं | उस आव़ाज की उस आत्मा की कद्र कीजिए | उससे मोहब्बत कीजिए | उसका ख्याल रखिए | मेडिटेशन ( ध्यान ) की तरफ जाइए | थोड़ा सुकून मिलेगा |

जिंदगी में ये मानकर चलिए कि सबसे बड़ी ख़ुशी आंतरिक ख़ुशी होती हैं | वर्ना अमीर हमेशा मुस्कुरा रहे होते | कभी उदास ना होते |

सीख – अपनी आत्मा की कद्र कीजिए | उससे मोहब्बत कीजिए | उसका ख्याल रखिए | मेडिटेशन ( ध्यान ) की तरफ जाइए | थोड़ा सुकून मिलेगा | और जिंदगी में हर महत्वपूर्ण फैसले लेते समय अपनी आत्मा ( अंतरात्मा ) की आवाज सुनिए |

Credit : MY FM

नोट : यह कहानी हमने नहीं लिखी हैं | हमने इसे केवल युट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे सुनाने वाले को दिया हैं |

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जिंदगी में सारा खेल मौके का हैं | मोटिवेशनल स्टोरी ( प्रेरणादायक कहानी )

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