रूम नंबर 111 | ऑरको के साथ घटी अजीबो गरीब घटनाएँ

रूम नंबर 111 | ऑरको के साथ घटी अजीबो गरीब घटनाएँ

Credit : Red Fm India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन 1 एपिसोड 9

आज की कहानी ऑरको के साथ घटी घटनाओं पर आधारित हैं | क्योंकि उन घटनाओं को याद कर आज भी आधी रात गए | उसकी नींद टूट जाती हैं | ये कहानी ऑरको के साथ एक महीनें पहले घटी कुछ ऐसी घटनाओं पर आधारित हैं | जो उनकी क्या हमारी भी कल्पनाओं से परे हैं |

ऑरको उन लोगों मे से हैं | जो भूत – प्रेत और आत्माओं का मजाक उड़ाते हैं | और उनके अनुसार इन अदृश्य शक्तियों का निवास हमारी कल्पनाओं की देन मात्र हैं | पर आज उनको भी इस चीज का अहसास हैं | कि उनकी ये सोच गलत थी |

करीबन एक महीनें पहले की बात हैं | ऑफिस के किसी काम से ऑरको को 6 दिनों के लिए केरला भेजा गया | पहले के 4 दिन उनके बड़े आराम से बीते | और पाँचवे दिन शुरू हुआ अजीबो – गरीब घटनाओं का सिलसिला | पाँचवे दिन उन्हें एक नए होटल में चेक इन करना था |

जो बोलगट्टी आइलैंड, कोच्चि में था | लम्बे सफ़र के बाद पाँचवे दिन दोपहर में वो उस होटल में पहुँचे | इस होटल में अजीब सी शांति थी | जो ऑरको को काफी अस्वभाविक सी लग रही थी | अचानक ही ऐसा प्रतीत हुआ मानों उसका पूरा शरीर भारी सा हो गया हैं | और उसके कदम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं |

इसका कारण शायद लम्बे से सफ़र के कारण शरीर में आई थकान भी हो सकती थी | होटल के मैनेजर ने उसे रूम नंबर 111 की चाबियाँ पकड़ाई | एक लम्बी सी गैलरी को पार करते हुए | रूम नंबर 111 तक पहुँचे | पर इस बीच गैलरी में एक बच्चे के रोने की आवाज ऑरको के कानों साफ़ – साफ़ पहुँच रही थी |

परन्तु वहाँ कोई बच्चा दिखाई ही नहीं दे रहा था | रूम नंबर 111 इस होटल की गैलरी का आखिरी कमरा था | रूम का दरवाजा खोलते ही ऑरको को हवा के एक झोंके ने जोरदार धक्का दिया | परन्तु आश्चर्य की बात ये थी | कि उस दरवाजें के खुलते के साथ ही बच्चे रोने की आवाज गायब हो गयी थी |

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ऑरको अपने ऑफिस के काम से केरला गया | जहाँ उसके इस सफ़र के पाँचवे दिन उसने कोच्चि के बोगकट्टी आइलैंड के पास में एक होटल में कमरा नंबर 111 लिया | कमरें के दरवाजें को खोलने से पहले पूरी गैलरी में एक बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी |

जो दरवाजे के खोलते के साथ बंद हो गयी | रूम के अन्दर की शांति ऑरको को काटने के लिए दौड़ रही थी | उसने कमरें को अन्दर से बंद किया और पलंग पर चुपचाप लेट गया | अजीब तरीके से उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ गया | बहुत ही असुरक्षित महसूस कर रहा था ऑरको खुद को |

उस कमरें के अन्दर जहाँ एक अजीब तरह की गंध आ रही थी | मानों जैसे महीनों से वो कमरा बंद पड़ा हो | और उसकी साफ़ सफाई नहीं हुई हो | उसने रिशेप्शन में फोन लगाने के लिए फोन उठाया | परन्तु फोन डेड पड़ा था | नहीं चाहते हुए भी ऑरको को उठना पड़ा |

उसके कमरें से रिशेप्शन काफी दूर भी था | रिशेप्शन की ओर जाने के रास्ते में होटल के स्टाफ उसे अपनी अजीब ही नजरों से ताड़ रहे थे | हालांकि इन सब बातों को नजरंदाज करते हुए | वो रिशेप्शन की ओर बढ़ता गया | वहाँ पहुँचकर उसने मैनेजर से कमरें के बारे में शिकायत दर्ज करी |

और उसका कमरा बदलने की रिक्वेस्ट करी | मैनेजर ने कहा – सर, इस वक्त और कोई कमरा खाली नहीं हैं | बस आज रात – रात की बात हैं | मैं सुबह आपका कमरा बदल दूंगा | और फिलहाल के लिए आपके कमरें की अच्छे से साफ़ – सफाई करवा देता हूँ |

करीबन एक घंटे के लिए ऑरको रिशेप्शन के सोफे पर ही लेट गया | आँखे खुली, तो घड़ी में दोपहर के 2 बज चुके थे | वो दौड़ता हुआ अपने कमरें में गया | और तैयार होकर अपनी मीटिंग के लिए निकल गया | उस दिन मीटिंग करीबन 8 बजे तक चली |

और मीटिंग से लौटने के बाद रात करीब 9 बजे होटल में डिनर किया | और रूम नंबर 111 में चला गया | उसके इस कमरें में एक बड़ी सी खिड़की थी | और खिड़की के बाहर का नजारा अविश्वसनीय था | खिड़की खोलते के साथ ही सामने का नजारा वाम्बनत लेक का था |

ऑरको ने टी. वी. ऑन किया | टीवी के बायीं तरफ एक बच्चे की तस्वीर लगी थी | तस्वीर देखकर लग रहा था कि वो किसी विदेशी बच्चे की तस्वीर थी | जिसके चेहरे से मासूमियत साफ़ झलक रही थी | और उसकी निगाहें ऑरको की तरफ थी |

सच मानिए उसकी निगाहें देख ऐसा लग रहा था मानों वो बस आप ही को घूरे जा रहा हैं | ऑरको ने तस्वीर की तरफ देखना बंद कर दिया | और टी. वी. बंद कर अपने लैपटॉप पर काम करना शुरू किया | और तभी अचानक ………..!

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बोलगट्टी आइलैंड के उस होटल के कमरें नंबर 111 में घुसने से पहले ही कोई ऑरको को चेतावनी दे रहा था | रूम में घुसने से पहले गैलरी में किसी बच्चे के रोने की आवाज, रूम के फोन का डैड पड़ा होना और एक अजीब तरह की दुर्गन्ध से सराबोर होना उस कमरें का |

मानों बहुत दिन से वो कमरा बंद पड़ा हो | रात का खाना खाकर अपने कमरें में ऑरको लैपटॉप पर काम कर रहा था | तभी अचानक उसे वही आवाज सुनाई दी | जो आज दोपहर को उसने सुनी थी | रात करीबन 10 बजे एक बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी |

टी. वी. पर नजर दौड़ाई तो टी. वी. बंद पड़ा था | ठीक से सुनने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था | मानों आवाज खिड़की के बाहर से आ रही हो | ऑरको ने उठकर खिड़की खोली | और आश्चर्यजनक रूप से खिड़की खोलने के बाद वो आवाज बंद हो गयी |

रात के समय खिड़की से वाम्बनत लेक का नजारा इतना सुन्दर था | कि वो पूर्ण रूप से उसे मंत्र मुग्ध कर रहा था | खिड़की के पास खड़े होकर वाम्बनत लेक की ओर देख ही रहे थे | कि तभी अचानक पीछे से उसे किसी ने धक्का सा दिया | ये धक्का बहुत ज़ोर से नहीं था | इसलिए उसके कदम बस हल्के से लड़खड़ाए |

परन्तु मन में एक डर जरूर पैदा हो गया था | क्योंकि उस कमरें में उसके अलावा और कोई भी नहीं था | उसने तुरंत खिड़की बंद करी | और टी. वी. ऑन करने के लिए जैसे ही रीमोट उठाया | उसकी नजर टी. वी. के बायीं ओर दीवार पर लगी उस विदेशी बच्चे की तरफ गई |

तस्वीर की ओर देख उसके पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी | क्योंकि उस तस्वीर पर उस बच्चे की आँख से पानी गिर रहा था | मानों वहीँ बच्चा रो रहा था | जिसकी तस्वीर वहाँ लगी थी | उसे लगा कि शायद वो कोई सपना देख रहा हैं | परन्तु कुछ ही देर में उसे यकीन हो चला था कि ये सब कुछ उसका वहम नहीं बल्कि हकीकत था |

चद्दर सिर तक तान ली थी ऑरको ने | ताकि उसकी आँखों के सामने सिर्फ़ अंधेरा हो | और कमरें की एक झलक भी उसके सामने न आये | ऑरको की चद्दर, उसे कोई धीरे – धीरे नीचे की ओर खींच रहा था !

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ऑफिस के काम से ऑरको केरला के वाम्बनत लेक के पास के एक होटल के कमरें नंबर 111 में रह रहा था | उस कमरें में ऑरको के साथ कुछ ऐसी घटनाएँ घटी | जिसने डरा तो दिया था | पर मजबूरी ये थी कि होटल का कोई भी कमरा खाली नहीं था |

इसलिए उसे आज की रात उसी कमरें में बितानी पड़ेगी | रात में उसे कमरें में इतना डर लग रहा था | कि उसने चद्दर सिर तक तान ली थी | ताकि उसे बाहर का कुछ भी नजर ना आये | लेकिन उसे कुछ यूं महसूस हो रहा था | कि कोई उसकी चद्दर को धीरे – धीरे नीचे की तरफ खींच रहा हो !

धड़कने काफी तेज हो गई थी | कि तभी अचानक चद्दर के अन्दर से वो एक पल उजाला और अगले ही पल अंधेरा देख पा रहा था | उसने अपनी सारी हिम्मत जुटाते हुए | अपने पूरे शरीर के ऊपर से चद्दर उठाई | चद्दर के हटाते के साथ ही उसने पाया |

कि बाथरूम की लाईट अपने आप जल और बुझ रही हैं | दबे क़दमों के साथ उसने बाथरूम की ओर जाना शुरू किया | और गौरतलब हैं कि बाथरूम की बत्ती का स्विच बंद पड़ा था | ऑरको जैसे ही बाथरूम से बाहर निकला | उसकी नजर पलंग पर गई |

जहाँ उसके लैपटॉप के साथ में छेड़छाड़ कर रहा था एक बच्चा | इस बच्चे की शक्ल उस तस्वीर वाले बच्चे से हूबहू मिल रही थी | वो बस उस बच्चे कि तरफ स्तब्ध होकर देखे जा रहा था | कि अचानक उस बच्चे ने उसकी तरफ अपनी नजर उठाई !

ऑरको के गले से कोई आवाज नहीं निकल पा रही थी | उसने तुरंत अपना होश संभाला और कमरें से बाहर की ओर भागा | वो दौड़ता हुआ रिशेप्शन की ओर जा ही रहा था | कि उसे होटल का एक स्टाफ मिला | ऑरको ने चिल्लाते हुए कहा – मैंने मेरे कमरें में एक बच्चे को देखा हैं |

ऑरको के इतना कहते के साथ ही उस होटल स्टाफ की आँखे बड़ी – बड़ी हो गई | मानों अकस्मात उसे कुछ याद आ गया | परन्तु उसने सभी चीजों को नजरंदाज करते हुए कहा – अगर आप ठीक समझें | तो आप यहाँ मेरे साथ आज की रात गुजार सकते हैं |

ऑरको ने उनका हाथ पकड़ा और कहा – चाचा, कुछ तो है जो आप बताना नहीं चाहते ! और फिर उसके बार – बार अनुरोध करने से चाचा ने कमरा नंबर 111 का सबसे बड़ा राज बताया |

करीबन 2 साल पहले लंदन से एक परिवार उस होटल में रहने आया | उन्होंने ने एक महीनें के लिए कमरा नंबर 111 बुक कर रखा था | और कमरें को अपने घर की तरह सजा लिया | वहाँ दीवार पर लगी पेंटिंग को उन्होंने अपने 5 साल के बच्चे की फोटो के साथ बदल दिया |

28 जून 2012 की रात न जाने पति – पत्नी के बीच ऐसी क्या बात हुई | पति ने तेज धार वाली छुरी से पहले तो अपनी पत्नी का खून कर दिया ! और फिर अपने 5 साल के बच्चे को खिड़की से बाहर वाम्बनत लेक में धकेल दिया और फिर खुद कमरें के पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली |

उस दिन से ये कमरा बंद पड़ा था | कमरें की हर एक चीजों को उस दुर्घटना के बाद बदल दिया गया था | लेकिन उस बच्चे की तस्वीर वहीँ की वहीँ थी | चाचा की बातें सुनते – सुनते कब ऑरको की आँख लग गयी | उसे पता ही नहीं चला |

सुबह जब आँख खुली तो चाचा उसे अगल – बगल कहीं नजर नहीं आये | परन्तु जाने से पहले वो चाचा से एक बार मिलना चाहता था | मैनेजर से जब ऑरको ने पूछा | तो वो उसकी कोई भी मदद नहीं कर पाए | उनके बगल में खड़ा और एक स्टाफ बड़ी उत्सुकता से चाचा का नाम ऑरको से पूछ बैठा |

ऑरको ने कहा कि उन्होंने अपना नाम रहमान बताया था | और मेरी मुलाकात उनसे कल रात को ही हुई थी | ये सुनकर उस स्टाफ ने कहा – आपको शायद कोई गलतफहमी हो रही हैं | क्योंकि रहमान की मौत तो 3 साल पहले ही हो चुकी हैं !

 

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी !

एक कहानी ऐसी भी

सीजन1   एपिसोड 9

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

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