मिस्टर एंड मिसेज चक्रवर्ती की कहानी, भूत की कहानी

मिस्टर एंड मिसेज चक्रवर्ती की कहानी

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1  एपिसोड 4

Credit : 93.5 Red FM India

आज की ये कहानी के ऑनरीबन के मोम एंड डैड के साथ आज से करीबन 38 साल पहले 1976 में घटी सर्दी की रात की एक घटना पर आधारित हैं | ऑनरीबन के डैड एक ऐसे काम से जुड़े हुए थे | जिसके कारण उन्हें वीक में एटलीस्ट 2 बार अपने कोलकाता के घर को छोड़ दुर्गापुर जाना पड़ता था |

उनकी कम्पनी ने उनके लिए दुर्गापुर में एक गेस्ट हाउस बुक कर रखा था | जहाँ उनके लिए एक अलग से कमरा था | वो जितनी बार भी दुर्गापुर जाते | उस गेस्ट हाउस के उसी कमरे में ठहरते | जिसकी खिड़की खोलने पर सामने वाले का दिल दहल जाए |

गेस्ट हाउस के उस रूम की खिड़की खोलते ही सामने के नजारा एक कब्रिस्तान का था | हालांकि इस बात से ऑनरीबन के डैड को कोई परेशानी नहीं थी | क्योंकि उनका विश्वास भूत – प्रेत और आत्माओं से ज्यादा अपने ईश्वर पर था | और दूसरा अपने आत्मविश्वास पर |

और ऐसा कहते हैं जिनका आत्मविश्वास और दिल मजबूत होता हैं | उन्हें भूत – प्रेत की बातें या उनकी मौजूदगी कभी सता नहीं सकती | इस गेस्ट हाउस में आज तक अनगिनत हादसे हुए | और तो और इस गेस्ट हाउस का मैंनेजर यहाँ आने वाले हर गेस्ट को शाम 5 बजे के बाद खिड़की खुली ना रखने की वार्निंग भी देता हैं |

जो ऑनरीबन के डैड कभी नहीं मानते थे | उनका इन बातों को नहीं मानने का सबसे कारण ये भी था | कि उन्होंने कभी भी इस गेस्ट हाउस में कुछ अजीबो गरीब महसूस ही नहीं करा था | लेकिन कभी – कभार आधी रात नींद में उन्हें ऐसा लगता जैसे कोई उनके कान के पास आकर उनका नाम पुकार रहा हो !

कई बार उन्होंने उठकर रूम में चारों तरफ नजर दौड़ाई | लेकिन वहाँ कोई नहीं था | दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज के इस कमरें में ऐसा क्या हुआ था | जिसके बाद ऑनरीबन के डैड लेट राणा चक्रवर्ती ने इस गेस्ट हाउस में आना तो दूर इसके बारे में सोचना तक छोड़ दिया था |

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लेट राणा चक्रवर्ती और उनके परिवार के साथ आज से करीबन 38 साल पहले 13 जनवरी 1976 की रात ऐसा क्या हुआ था | जिसने उन्हें दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज में जाना तो दूर | उसके बारें मे सोचना भी बंद करा दिया |

हर बार की तरह राणा चक्रवर्ती अपने काम के सिलसिले से कोलकाता से दुर्गापुर गए | लेकिन इस बार वो अकेले नहीं थे | इस बार उनकी वाइफ मीनाक्षी चक्रवर्ती और उनका 3 साल का बेटा ऑनरीबन भी उनके साथ गया |

लॉज में घुसते के साथ ही वहाँ के मैंनेजर ने उनका स्वागत एक लम्बी सी स्माइल से करा | क्योंकि मिस्टर चक्रवर्ती यहाँ हमेशा आते रहते थे | उनकी जान पहचान यहाँ के मैंनेजर स्टाफ सारे के सारे लोगों से बहुत ही अच्छी थी | या यूं कहिए कि वो सारे लोगों से किसी दोस्त की तरह ही मिलते थे |

मैंनेजर ने बातों ही बातों में सजेस्ट करा कि इस बार मिस्टर चक्रवर्ती किसी और कमरे में ठहर जाएँ | ना कि उसमें जिसमें वो हमेशा ठहरते थे | मिस्टर चक्रवर्ती ने मैंनेजर की एक नहीं सुनी | और उससे हंसते हुए कहा – उन्हें उसी कमरें की चाबी दे दे | जिसमें वो हमेशा ठहरते हैं |

अजीब कश्मकश वाली परिस्थिती में मैंनेजर ने वो चाबियाँ तो मिस्टर चक्रवर्ती को चाबियाँ तो दे दी | लेकिन साथ ही साथ मिसेज मीनाक्षी चक्रवर्ती से एक छोटी सी गुज़ारिश करी | उसने कहा कि शाम 5 बजे के बाद खिड़की खुली न रखें मैडम |

और हो सके तो किसी भी समय खिड़की के सामने खड़े होकर अपने बाल ना बनाएँ | ये चेतावनी मैंनेजर हर गेस्ट को देता था | लेकिन आज उसे एक अजीब सा डर लग रहा था | क्योंकि आज पहली बार मिस्टर चक्रवर्ती अपने परिवार के साथ यहाँ आये थे |

और वो नहीं चाहता था कि उनके साथ कोई दुर्घटना घटे | कमरें में चेक इन करने के बाद मिस्टर चक्रवर्ती अपने काम से बाहर चले गए | और मिसेज चक्रवर्ती अपने 3 साल के बेटे को रूम में छोड़ खुद नहाने चली गई | नहाकर जब वो बाहर निकली |

तो अपने बाल सुखाने वास्ते उन्होंने खिड़की खोली | और खिड़की खोलते के साथ ही सामने का दृश्य उनके सामने था | सामने का दृश्य देखकर उनकी आँखे फटी की फटी रह गयी |

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दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज के मैंनेजर ने मिसेज मीनाक्षी चक्रवर्ती को एक चेतावनी दी थी | उसने कहा था कि शाम के 5 बजे के बाद कमरें की खिड़की खुली ना छोड़े | और किसी भी हालत में खुले बालों के साथ उस खिड़की के सामने ना खड़े हो |

मिसेज मीनाक्षी ने मैंनेजर की इन बातों को कोई महत्व नहीं दिया | और नहाकर आने के बाद अपने बाल सुखाने के लिए खिड़की का दरवाजा खोल ही लिया | खिड़की खोलते के साथ ही जिस बात से वो अनजान थी | वो उनके सामने था |

जितनी दूर मिसेज चक्रवर्ती की नजर गई | उन्हें बस कब्र ही कब्र दिखाई दे रही थी | इस दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज के पीछे एक कब्रिस्तान था | जिंदगी के बाद की इस सच्चाई को देख | मिसेज मीनाक्षी बहुत डर गयी थी | उन्होंने तुरंत खिड़की बंद करी |

और अपने 3 साल के बेटे ऑनरीबन को लेकर पलंग पर बैठकर उस भयावह स्थिति में अपने पति का आने का बेसब्री से इंतजार करने लगी | शाम करीबन 6 बजे मिस्टर चक्रवर्ती अपने काम से लौटे | उनको देखकर मिसेज चक्रवर्ती की सांसों में सांस आई |

उन्होंने अपने हसबैंड से रिक्वेस्ट करा कि वो मैंनेजर से बात करके अभी का अभी रूम चेंज करें | क्योंकि इस रूम की खिड़की के ठीक सामने कब्रिस्तान हैं | जिसका एक – एक दृश्य शायद रातभर उन्हें अर्थात् मिसेज मीनाक्षी चक्रवर्ती को शायद सोने ना दे |

मिस्टर चक्रवर्ती ने अपनी बीवी को बताया कि पिछले 5 साल से जब – जब वो दुर्गापुर आये हैं | इस लॉज के इसी कमरे में ठहरे हैं | और ये दिलासा दिया कि आज तक उनके साथ ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ | जो इस बात से उन्हें डरा दे कि उनके रूम की खिड़की के ठीक सामने का नजारा एक कब्रिस्तान का हैं |

बहुत समझाने के बाद मिसेज चक्रवर्ती कन्वेंस हो गयी | और आज की रात इस रूम में बिताने का फैसला किया | पर इन सब के बीच मिसेज चक्रवर्ती ने एक बात छुपाई | मैंनेजर की चेतावनी के बावजूद मिसेज चक्रवर्ती ने न तो सिर्फ़ खिड़की खोली | बल्कि वो वहाँ खुले बालों में कुछ देर के लिए खड़ी भी थी |

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ये बात तो शायद आपने तो भी कभी न कभी कहीं न कही जरूर सुनी होगी | कि शाम ढ़लने के बाद बाल खोलकर छत पर ना घूमें | या फिर रात को सोते वक्त अपने बालों को जरूर बाँध ले |

अनाजाने में ये गलती मिसेज चक्रवर्ती के साथ दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज के उस कमरे में हो गई | जिसकी खिड़की के ठीक सामने एक कब्रिस्तान था | 13 जनवरी 1976 की के बाल हवा में थे | मानों कोई अदृश्य शक्ति उन्हें अपनी ओर खींच रही हो | और खुद को बचाने के लिए मिसेज चक्रवर्ती टेबल के एक कोने को पकड़ी हुई हैं |

और डर के कारण उनके गले से कोई आवाज भी नहीं निकल पा रही हैं | एक पल को तो मिस्टर चक्रवर्ती को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ | पर फिर उन्होंने हिम्मत  रात करीबन 11 बजे मिस्टर चक्रवर्ती की नींद को उन्ही के रूम से आ रही एक अजीब सी आवाज ने तोड़ दिया |

उन्होंने उठकर देखा तो पाया कि उनकी बीवी मीनाक्षीजुटाकर अपनी बीवी का हाथ पकड़ उसे अपनी ओर खींचने की पूरी कोशिश की |

उनकी ये कोशिश नाकामियाब हो रही थी | क्योंकि वो अदृश्य शक्ति बहुत ज्यादा शक्तिशाली थी | जो मिसेज चक्रवर्ती को उस कमरें से बाहर की ओर घसीट रही थी | मिस्टर चक्रवर्ती ने ज़ोर – ज़ोर से मदद की गुहार लगानी शुरू कर दी |

और कुछ ही पलों में उस लॉज के अगल – बगल के कमरें के लोग और मैंनेजर भी आ गया | सब ने मिलकर बहुत मुश्किल से मिसेज चक्रवर्ती को बिस्तर पर लेटाकर उनके हाथ पाँव बांधे | इस हालत में भी मिसेज चक्रवर्ती के शरीर के अन्दर न जाने कैसी अद्भुत शक्ति थी |

जो उस पूरे पलंग को हिलने पर मजबूर कर रही थी | इस हालत में मिसेज चक्रवर्ती बस एक ही बात बार – बार कहे जा रही थी | कि कोई मुझे मारना चाहता हैं | और वो मुझे मौत की ओर घसीट रहा हैं |

प्लीज मुझे बचा लो | मिस्टर राणा चक्रवर्ती काफी साहसी इंसान थे | उन्होंने रातभर अपनी बीवी के सिर पर हाथ रख | अपने गुरु द्वारा दिए गए मंत्र का जाप किया | सूरज की पहली किरण के साथ मिसेज चक्रवर्ती की हालत बहुत सुधर चुकी थी |

मानों पिछली रात उनके साथ कुछ हुआ ही नहीं था | बस उनके शरीर में एक अजीब सी थकान थी | मिसेज चक्रवर्ती के साथ जो कुछ भी हुआ | आपको शायद ये उनके डर से उत्पन्न हुई मानसिक परिस्थिती लगे |

लेकिन अचानक से मिसेज चक्रवर्ती के शरीर में आई अपार शक्ति जिसको काबू में करने में करीबन 5-6 लोगों की मदद लेनी पड़ी | इसे एक्सप्लेन करना बहुत मुश्किल होगा |

दुर्गापुर टूरिस्ट लॉज आज भी मौजूद हैं | लेकिन वहाँ कोई नहीं रहता | कई सालों से वो वीराना पड़ा हैं |

 

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन1  एपिसोड 4

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

भूत – प्रेत की कहानियाँ

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