रात सावन ऑडिटोरियम में, भूत की कहानी

ऑडिटोरियम

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1 एपिसोड 98

Credit : 93.5 Red FM India

horror story

बरसो पुराने सावन ऑडिटोरियम को तोड़कर, वहाँ मल्टीप्लेक्स बनाये जाने की बात काफी दिनों से चल रही थी | कुछ खरीददारों से बात काफी आगे बढ़ चुकी थी |

नरेश बड़े अरमान लेकर गाँव से शहर भाग कर आया था | लेकिन किस्मत की मार से बच नहीं पाया | अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाया | और पैसों की दिक्कत के कारण उसने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी ले ली |

ये रात सावन ऑडिटोरियम में उसकी पहली रात थी | रात एक बजे तक वो ऑडिटोरियम के बाहर ही ड्यूटी कर रहा था | फिर उसने सोचा कि क्यों न एक बार अन्दर चल कर देखा जाए | उसने ऑडिटोरियम के भारी – भरकम दरवाजे को खोला |…….र…. र…. र… .र !

और अन्दर घुसते के साथ ही ऑडिटोरियम के ऊपर वाले हिस्से से किसी के भागने की आवाज आई….. ठक…ठक…ठक…ठक…! नरेश तुरंत उस तरफ भागा | और दौड़ता हुआ ऊपर तक गया | तो कोई भी दिखाई नहीं दिया |

इसके बाद नरेश ने ऊपर के दरवाजें को अच्छे से बंद किया | और फिर वापस अपना एक अधूरा काम पूरा करने स्टेज की तरफ आगे बढ़ने लगा | नरेश ने बचपन से ही एक थिएटर आर्टिस्ट बनने का सपना देखा था |

आज उसकी आँखे हर कदम के साथ… नम होती जा रही थी | और पूरे ऑडिटोरियम में उसके क़दमों की आवाज गूँज रही थी ….ठक…ठक…ठक ! उस खाली पड़े ऑडिटोरियम में कुछ टूटी हुई और कुछ साबुत बची कुर्सियाँ को देखते हुए | और सीलन भरी छत के नीचे स्टेज पे खिंचे हुए बंद पर्दे के आगे खड़े होकर, किसी नाटक के हीरों की तरह,
नरेश ने बोलना शुरू किया – छब जो तेरी देखूं पिया…
नयन भर मैं काहें रोऊँ पिया….
प्रीत जो लागी इस मुख से तोरे…..
प्रीत जो लागी इस मुख से तोरे…..
काहे चाहूं रे तोहे देखूं पिया…. तोहे देखूं पिया…..!
बोलना नरेश को कुछ और था लेकिन उसने बोला कुछ और….!

उस खाली पड़े ऑडिटोरियम में तालियों की आवाज की गड़गड़ाहट से किसी भी इंसान का डर जाना लाजमी था | नरेश आँखे खोल के देखा – तो सामने कुर्सियाँ खाली पड़ी थी | और आखिर में एक टूटी कुर्सी के लकड़ी के टुकड़े के गिरने की आवाज भी आई…..धम्म……. !

नरेश तुरंत उस तरफ भागा | लेकिन ज्यादा दूर जा नहीं पाया था | क्योंकि स्टेज के पीछे से आती आवाज …टक….टक….टक…..टक……! ने उसे अपनी ओर खींचा | नरेश पीछे से आती तालियों की आवाज की ओर भागा !

स्टेज पर चढ़कर पर्दे को खोलकर स्टेज के पीछे जहाँ से ये आवाज आ रही थी | वो उस ओर अपने आप जाने लगा |

नरेश उस आवाज का पीछा करते हुए, बैक स्टेज तक पहुँचा | ग्रीन रूम से आती रोशनी देख – नरेश उस तरफ धीरे – धीरे बढ़ा | और दरवाजें की आढ़ से हाथ में लाठी लिए संभलकर झाँका | तो देखा – अन्दर कोई नहीं था | सिर्फ एक मेकअप किट का सामान टेबल पर बिखरा पड़ा था |

नरेश ने कमरें की बत्ती बंद की | दरवाजें को बंद किया | नरेश वापस दरवाजें तक जाए……! इससे पहले उसने स्टेज से आती पर्दों की आवाज सुनी……..!

नरेश स्टेज की तरफ भागा | और वहाँ पहुँचकर देखा – पर्दा थोड़ा अपनी जगह से खिसका हुआ था | नरेश को लगा कि शायद उसका वहम होगा | ये सोचकर वो वापस मेन गेट की तरफ जाने के लिए ऑडिटोरियम की सीढ़ीयों से उतरकर वापस जा ही रहा था कि पीछे से आवाज आई……धम्म……. !

पलटकर नरेश ने देखा – तो थोड़ी देर पहले तक थोड़ा – सा खुला हुआ पर्दा पूरी तरह से बंद हो चुका था |
————————–


नरेश जिस थिएटर में गार्ड की नौकरी के लिए आया था | वो कई सालों से बंद हो चुका था | वहाँ सालों से कोई नाटक या प्रोगाम नहीं हुआ था |
उस रात उसने वहाँ खाली पड़े ऑडिटोरियम में किसी के कदमों की आहट सुनी | ऑडियंस की आवाजें सुनी | तालियों की आवाजें सुनी और पर्दा अपने आप बंद हुआ |

इतना सबकुछ होने के बाद नरेश वहाँ और ज्यादा रुक नहीं पाया | वह चुपचाप बाहर गेट पर रोड के पास जाकर बैठ गया |

सुबह ड्यूटी खत्म हुई | तो दूसरा गार्ड बलराम आया | नरेश ने उसे कुछ नहीं बताया | और चुपचाप अपने घर चला गया |

दिनभर रात की बातों को ही सोचता रहा….. | और आखिर में समझ गया | कि शायद कोई अन्दर घुसा था चोरी करने | और जब उसे कुछ नहीं मिला | तो वहाँ से भाग लिया |

शाम करीब 6 बजे नरेश फिर अपनी ड्यूटी पर पहुँच गया | सर्दियों के दिन थे तो अंधेरा जल्द ही हो गया था | नरेश ने ड्यूटी हैंडऑवर लेकर थोड़ी देर तक इंतजार किया | लेकिन फिर जब रहा नहीं गया | तो वापस ऑडिटोरियम के अन्दर गया |

अन्दर जाके देखा – तो पर्दे खुले हुए थे | पीछे जाकर देखा – तो ग्रीन रूम बंद था | सब कुछ ठीक था वहाँ | नरेश एक – एक करके सारे कमरें चेक कर रहा था | अन्दर झांककर उसने सब कुछ चेक किया | बत्तियाँ बुझाई |

और फिर बाहर आते वक्त देखा – एक कमरा बंद था | उसे खोलने के लिए खींचा तो दरवाजा खुला नहीं | शायद दरवाजा जाम हो गया था……. | ये सोचकर ज़ोर से 2-3 बार खींचा | लेकिन दरवाजा तब भी नहीं खुला |

इंटरलॉक जैसा कोई ताला लगा था शायद | पूरी ताकत से दरवाजें पर 5-6 बार मारा | तो दरवाजा ज़ोर की आवाज के साथ खुल गया ………….|

अन्दर देखा – तो पूरा कमरा अलग – अलग रंग – बिरंगे कॉस्ट्युम से भरा पड़ा था | नरेश की आँखों में जैसे चमक आ गयी थी | उसने सामने रखा एक राजा मुकुट उठाकर पहना |

और तनकर किसी राजा की तरह चलता हुआ स्टेज पर गया | मन ही मन उसने मान लिया था जैसे पूरा होल भरा हुआ हैं | और सब बस नरेश को ही देखने आये हैं |

किसी राजा की तरह मूंछों पर ताव देते हुए उसने ज़ोरदार आव़ाज में कहा – सेनापति शत्रु के आक्रमण का उत्तर देना हैं हमें | सेना को तैयार कीजिए | कल प्रातः काल हम शत्रु के रक्त से स्नान करके युद्धभूमि से ही अपनी विजय का शंखनाद करेंगे |

नरेश ने अपनी बात पूरी की | तो जिस हॉल को वो पूरा भरा हुआ मान रहा था | आँखे खोलने पर वहाँ पर एक आवाज भी नहीं थी | सिवाय पीछे से आती एक आव़ाज के….. टक…..टक……टक….टक…….|

नरेश बहुत ध्यान से बिना हड़बड़ाए या घबराए उन तालियों की आव़ाज के पीछे – पीछे गया | आवाज ग्रीन रूम से आ रही थी | झांककर जलती हुई आव़ाज करती हुई ट्यूबलाईट की रोशनी में देखा तो एक लड़की बैठी हुई मेकअप कर रही थी |

और नरेश को देखते ही उसने कहा – वाह दिवाकर आज एक बार फिर सारी तालियाँ तुम ले गए | देखती हूँ इसके बाद मेरा क्या होता है | मेरी एंट्री आ गई |

वो लड़की उठी और नरेश के बगल से होते हुए स्टेज की ओर चली गई | नरेश वहाँ खड़ा – खड़ा यही सोच रहा था कि उसने मुझे दिवाकर नाम से क्यों बुलाया | कि ठीक तभी उसकी नजर सामने आईने पर गयी |

नरेश समझ नहीं पा रहा था | कि वो होश में है या बेहोश | वो सिर्फ़ एक मुकुट नहीं पहने था | बल्कि पूरा का पूरा राजा के कॉस्ट्युम में था…… |

नरेश कोशिश तो ख़ुद को संभालने की बहुत कर रहा था | लेकिन वो तो जैसे अपने काबू में ही नहीं था | बड़ी – बड़ी खुली आँखों और खुला मुंह लिए स्टेज की ओर भागकर गया | तो पूरा स्टेज खाली था | और वो लड़की वहाँ नहीं थी |

नरेश जैसे अपनी बेहोशी से जागा हो, वो भागकर उस कॉस्ट्युम वाले कमरें की ओर गया | दरवाज़ा जो वो खुला छोड़कर गया था | वो बंद पड़ा था | एक बार फिर जी तोड़ कोशिश की उसने उस दरवाजें को खोलने की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ |

नरेश हार मानने को तैयार ही नहीं था | ताबड़तोड़ उस दरवाजे पर धक्के मारे जा रहा था…….. | लेकिन काफी देर तक जब कोई फायदा नहीं हुआ | तो जमीन पर थक कर बैठ गया |

और तभी उसके कंधे पर पीछे से हाथ रख कर कहा – महाराज आपका समय समाप्त हुआ…………………. |
——————————-


नरेश को थिएटर में नाईट ड्यूटी के दौरान स्टेज का पर्दा हिलता हुआ मिला | किसी के क़दमों की आहट भी सुनाई दी | कॉस्ट्युम रूम का ताला तोड़कर अन्दर से एक राजा का मुकुट निकालकर पहनकर स्टेज पर डायलॉग बोला – तो खाली ऑडिटोरियम में ताली की आवाज भी आई |

पीछे जाकर देखा – तो ग्रीन रूम में कोई लड़की थी | जो नरेश के बगल से होते हुए स्टेज तक जरूर आई | लेकिन उसके बाद वो कहीं भी दिखाई नहीं दी | नरेश वापस कॉस्ट्युम रूम की ओर गया | तो किसी ने पीछे से कंधे पर हाथ रखकर कहा – महाराज आपका समय समाप्त हुआ………….. |

नरेश ने पीछे पलट कर देखा तो बलराम था वहाँ का दूसरा सिक्योरिटी गार्ड | उसने हंसते – हंसते कहा – अरे राजा साहेब क्या बात है | ये मुकुट कहाँ से मिला आपको |

नरेश ने उसे बताया कि मुकुट उसे इस कमरें से मिला है जो अब खुल ही नहीं रहा | वैसे बलराम तुम इतनी रात यहाँ क्या कर रहे हो ? तुम्हारी तो सुबह 7 बजे की ड्यूटी है ना |

सुनकर बलराम ने कहा – अब राजा साहेब आप तो प्रजा की सेवा में रात – दिन सब भूल गए हैं | घड़ी देखने का जरा कष्ट कीजिए | नरेश ने घड़ी की ओर देखा | तो समझ आया कि सुबह के 7 बज रहे थे…… |

बलराम फिर बोला – नाईट ड्यूटी में ऐसा ही होता है | घर जाकर आराम करिए | नरेश ने भी सोचा कि शायद ये बात बिल्कुल सही है |

झुके हुए कंधों के साथ थका हारा सा वो बाहर निकला तो देखा | चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था…… |

सुबह 7 बजे सर्दियों में भी इतना अंधेरा तो नहीं होना चाहिए | एक बार उसने अपनी घड़ी की ओर देखा तो इस वक्त रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे ……….|

नरेश का हाल इस वक्त ऐसा था कि हल्की सी आव़ाज भी सुन लेता | तो शायद डर से मर जाता……. | लेकिन किसी तरह गेट पर ही उसने पूरी रात बिताई |

सुबह जब बलराम आया तो उसको हैंडऑवर देते वक्त उसने दो दिन में उसके साथ जो कुछ भी हुआ | वो सारी बात बताई | बलराम ने कुछ कहा तो नहीं लेकिन थिएटर के मालिक को पूरी खबर दे डाली |

जब थिएटर बेचने की कोशिशें हो रही हो | तो ऐसी अफवाहें कितना नुकसान कर सकती हैं | यही सोचकर उन्होंने नरेश को नौकरी से निकाल दिया |

दूसरा कोई गार्ड आये, तब तक बलराम को ही नाईट ड्यूटी दी गई | रात को खाना – वाना खाकर बलराम बाहर गेट के पास ही बैठा था | कि एक आव़ाज ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचा |
जो उसका ही नाम पुकार रही थी |
बल……रा…..म…..!
बल……रा…..म…..!
बल……रा…..म…..!

वो उस आव़ाज का पीछा करते हुए | ऑडिटोरियम के अंदर गया | अंदर जब हॉल के दरवाजें पर बलराम खड़ा था | तो उसने देखा ऑडिटोरियम का दरवाजा जिससे वो अन्दर आया था वो धीरे – धीरे अपने आप बंद हो रहा था |

बलराम सब कुछ देख रहा था | लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था | वो जैसे होश में भी बेहोश था | वो बस उसे पुकारती आव़ाज के पीछे – पीछे चला जा रहा था |

अन्दर हॉल में दोनों तरफ बैठने की कुर्सियों के बीच से एक – एक करके कुर्सियों की कतार को, जैसे – जैसे बलराम पार करता रहा था | वैसे – वैसे वो कुर्सियाँ ऐसे खुल रही थी | जैसे उन पर लोग बैठें हो |

स्टेज के पास पहुँचा तो बलराम के चेहरे पर एक लाईट चमकी | रोशनी इतनी तेज थी, बलराम को अपनी आँखे हाथों से ढ़कनी पड़ी | लेकिन रोशनी फिर भी उतनी ही तेज लग रही थी |

इतने में बलराम को महसूस हुआ जैसे हॉल में ऑडियंस की बहुत ज्यादा भीड़ हैं | धक्का – मुक्की और लोगों का आना – जाना महसूस कर पा रहा था वो |
इसी बीच बलराम को एक धक्का लगा | और सिर के बल जमीन पर गिर पड़ा |

सिर पर उसके चोट आई थी | और खून भी बह रहा था | धीरे – धीरे उठा तो ध्यान दिया कि अब भी जो भीड़ की लोगों की आवाजें और धक्के लग रहे थे |

वो सबकुछ थम गया था | सुकून और सन्नाटा पसरा हुआ था पूरे हॉल में और तभी उसी सुकून और सन्नाटे को चीरती हुई | एक आव़ाज सुनी बलराम ने | और देखा स्टेज का पर्दा अपने आप धीरे – धीरे खुला रहा था ……….|
—————————


नरेश ने बलराम को जब सबकुछ बताया | कि दो रातों से इस ऑडिटोरियम में उसे भूत – प्रेत दिखाई दे रहें थे | और उनकी आवाजें भी सुनाई दे रही थी | तो बलराम ने ये सारी बातें मालिक को बता दी | जिसकी वजह से नरेश की नौकरी चली गई |
और उसके बाद बलराम के साथ भी कुछ वैसा ही हुआ | नाईट ड्यूटी के दौरान बलराम को किसी ने उसके नाम से पुकारा ………..बल………..रा…………म………..!
बल………..रा…………म………..!
बल………..रा…………म………..!

तो वो अन्दर हॉल तक गया वहाँ उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे पूरा हॉल खचाखच लोगों से भरा हुआ हैं | कुर्सियाँ अपने आप खुलने लगी | और अचानक गिरने की वजह से सिर पर उसे काफी गहरी चोट लगी | ऑडिटोरियम का पर्दा भी अपने आप खुला और लाईट्स ऑन हुई |

स्टेज पर बलराम ने देखा तो लोग नकाब पहने हुए स्टेज के दोनों तरफ से आ रहें हैं | और एक लड़की स्टेज के बीच में एक लम्बे से खंभे से बंधी हुई हैं | धीरे – धीरे वो नकाब पहने लोग उस लड़की की तरफ आगे बढ़ रहें हैं | और वो लड़की जैसे किसी मधहोशी में हो | बस अपने ख्यालों में हंसे जा रही थी ………..हंह……ह…. हंह….ह… हंह…… !

वो दोनों नकाबपोश इंसान उस लड़की के करीब आये | और उसे आग लगा दी………! लड़की उस जलती आग की वजह से ज़ोर ज़ोर से चीखती रही ……आ…..आ…..बचाओ…..आ……..आ…….बचाओ…………………. !
लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था……… |

बलराम खड़ा – खड़ा बड़ी – बड़ी आँखों से ये मंजर देख ही रहा था | कि उन दोनों में से एक की नजर बलराम की ओर घूमी | बलराम अब जैसे अपने सपने से जागा था |

उसने देखा कि जो भी उसने देखा था वो सब वहाँ पर हो रहा था | और ये उसका कोई सपना नहीं था | वहम नहीं था | आग उसकी आव़ाज अभी भी उसके कानों तक आ रही थी | वो जलकर मर चुकी थी | उसकी चीखें शांत हो चुकी थी |

लेकिन वो नकाबपोश आदमी बलराम की ओर दौड़ा चला आ रहा था | बलराम वहाँ से जितनी तेज हो सके उतनी तेज दौड़ा | लेकिन मौत से तेज भला कोई कभी भाग पाया हैं | बलराम कुछ दूर भागने के बाद ही ठोकर खाकर गिरा | और सिर पर लगी चोट पर ही दोबारा उसके चोट लगी | और इस बार कुछ ही मिनटों में उसकी जान निकल गई |

अगली सुबह पुलिस को बलराम की लाश मिली | किसी को आनन – फानन में निगरानी के लिए रखना ही था | और अब तो पुलिस केस भी बन चुका था | ऐसी हालत में ऑडिटोरियम के मालिक ने नरेश को ही वापस नौकरी पर रखना सही समझा |

नरेश दो दिन के बाद फिर शाम को 5 बजे नौकरी पर आया | सबकुछ चेक करने के बाद उसी कॉस्ट्युम वाले दरवाजें के पास गया | तो दरवाजा इस बार आराम से खुल गया | वही मुकुट फिर निकालकर उसने पहना और धीमें क़दमों से नरेश मुस्कुराता हुआ |

स्टेज पर चढ़ा और एक बार फिर किसी राजा की तरह मूछों को ताव देते हुए अपनी बाहें फैलाते हुए ज़ोर से कहा – जो एक बार इस मंच का हो गया | वो हमेशा – हमेशा के लिए यही का होकर रह जाता हैं |

नरेश इसके आगे कुछ बोले उससे पहले ही तालियों की आवाज एक बार फिर आई | वाह… दिवाकर वाह सचमुच तुम्हारा कोई…..जवाब नहीं |

सालों पहले इस थिएटर में एक प्ले के दौरान आग लगी थी जिसमें कई थिएटर आर्टिस्ट मारे गए थे | और उसके बाद से वो थिएटर आज भी वैसा का वैसा ही वीरान पड़ा हैं | और वहाँ कोई मल्टीप्लेक्स नहीं बना !

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

प्रकाश और नंदिनी की भूत की कहानी

Credit : 93.5 Red FM India
एक कहानी ऐसी भी
सीजन 1 एपिसोड 98
ऑडियों सुनने के लिए सामने लिंक पर क्लिक करें — एक कहानी ऐसी भी
सीजन 1 – एपिसोड 98

Note : – यह कहानी हमनें नहीं लिखी हैं | हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा | जिसका Credit हमने इसको बनाने वाले को दिया हैं |

horror story

अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आती हैं तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं | हमें आपके फीडबैक का इंतजार रहेगा |

No comments:

Recent Post

ads
Powered by Blogger.