पीयूष और तापूशी की भूत की कहानी

पीयूष

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी | सीजन 1  एपिसोड 2

आज की कहानी हमें शहर कोलकाता के बागुई हाटी में रहने वाली तापूशी रॉय चौधरी ने करीबन एक सप्ताह पहले बताई | जो आज से 17 साल पहले की घटना हैं |

तापूशी के भाई पीयूष के साथ कई सालों तक अजीबों – गरीब घटनाएँ घटी | आज पीयूष मुंबई में रहता हैं | और एक कॉलसेंटर में काम करता हैं | आज उसकी उम्र करीबन 32 साल की हैं | परन्तु उसके साथ ये घटनाएँ शुरू हुई तब | जब उसकी उम्र थी केवल 15 साल |

पीयूष के पिताजी का अपना व्यापार था | और कोमोलर विध्यामंदिर में एक बंगाली अध्यापक | ख्यालातों के हिसाब से वो काफी आधुनिक थे | इसलिए पहले – पहले पीयूष की परेशानी को उन्होंने उसके वहम का नाम दिया |

परन्तु धीरे – धीरे उनकों भी यकीन होता गया कि पीयूष की बातों में सच्चाई हैं | पीयूष को रात को सोते के साथ ही एक 15 साल की लड़की रोते हुए दिखाई देती ……….उंह…..ह….हं…..ह….|

सपने में ही जब पीयूष उससे पूछता कि वो क्यों रो रही हैं | तो वो और ज़ोर – ज़ोर से रोने लगती | पीयूष को हर दिन रात को सपना एक न एक बार जरूर आता | धीरे – धीरे आलम ये हो गया कि उसे ये सपना दिन में भी आने लगा |

जब कभी दोपहर में उसकी आँख लगती | उसे ये सपना आता | और जब – जब इस सपने से उसकी आँखे खुलती | तो पसीने से उसका शरीर तरबतर रहता | पीयूष ने अपने माँ – बाप से इस सपने का जिक्र किया |

परन्तु किसी ने उसकी बात को कोई तवज्जों नहीं दिया | एकमात्र उसकी बहन तापूशी उसका सहारा थी | तापूशी ने कहा कि वो पढ़ाई – लिखाई के अलावा खेल – कूद की ओर भी थोड़ा ध्यान दे |

हो सकता है कि अगर उसका ध्यान कहीं ओर बंट जाए | तो ये परेशानी शायद उसकी धीरे – धीरे खत्म हो जाए | तापूशी ने यहाँ एक गलती कर दी | उसको शायद ये समझ नही आया कि उसके भाई पीयूष की परेशानी खुली आँखों की नहीं, बंद आँखों के सामने आती हैं |



वो हर रात अपने भाई पीयूष के बगल में सोती | अर्थात् तापूशी और उसने अधिकतर अपने भाई को रात की तन्हाईयों में रोता हुआ पाया | पूछने पर कारण वहीँ सपने निकलते | पीयूष की उम्र बढ़ती गयी | विध्यालय से उसने अब विश्व विध्यालय तक का सफ़र तय कर लिया था |

ये उसके कॉलेज का पहला दिन था | जब पहली बार उसने अपने सपने को अपनी आँखों के सामने देखा | कॉलेज के पहले दिन पीयूष के साथ उसकी दीदी भी गई थी | उसे कॉलेज तक छोड़ने के लिए |

कॉलेज के मेन गेट पर दूर से पीयूष को एक 15 साल की लड़की दिखाई दे रही थी | और जैसे – जैसे उसके कदम कॉलेज के मेन गेट की ओर बढ़ते गए | वैसे – वैसे उसका सपना उसकी आँखों के सामने आता गया |

जिस लड़की को पीछे कई सालों से पीयूष अपने सपने में देख रहा था | वो उसके सामने खड़ी थी | पीयूष ने अपनी बहन तापूशी से कहा – देखो दीदी ये वहीँ लड़की है जो मेरे सपने में आती हैं | परन्तु अचंभित करने वाली बात यही थी कि तापूशी को उस दरवाजें के सामने कोई भी नजर नहीं आ रहा था |

उसने अपने भाई को समझाने की कोशिश की | लेकिन वो समझने को तैयार ही नहीं था | उल्टा चीख़ – चीख़ कर तापूशी को झूठा कह रहा था | क्योंकि वो लड़की उसे साफ़ – साफ़ नजर आ रही थी | लेकिन पहली बार उसने उस लड़की को रोते हुए नहीं | बल्कि मुस्कुराते हुए देखा था |

इस घटना के बाद से अक्सर पीयूष को वो लड़की दिन के उजाले में यहाँ – वहाँ दिखने लगी | और आश्चर्यजनक रूप से उसे रात को वो सपने आना बंद हो चुके थे | कॉलेज में उसने अपने दोस्तों से अपनी इस परेशानी के बारे में जिक्र किया |

तो उसके दोस्त उसे पागल – पागल कहकर उसका मजाक उड़ाने लगे | वो दिनभर रोता – रहता | वो धीरे – धीरे डिप्रेशन में रहने लगा था |

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15 साल की उम्र से पीयूष को अपने सपने में हर रात एक लड़की दिखाई देती | जो सिर्फ़ रोती रहती | न जाने वो पीयूष से क्या कहना चाहती थी | कॉलेज में दाखिले के बाद अचानक से ही पीयूष को वो सपने दिखाई देना बंद हो गए |

परन्तु अब दिन के उजाले में पीयूष को वो लड़की आँखों के सामने साक्षात्कार दिखाई देती | परन्तु आश्चर्यजनक रूप से और कोई भी उस लड़की को नहीं देख पाता | धीरे – धीरे पीयूष पागलपन की ओर खिंचा चला जा रहा था | उसके इन हालात में उसकी मुलाक़ात हुई रीता नाम की एक लड़की के साथ |

धीरे – धीरे उन दोनों के बीच प्यार उमड़ने लगा और उन्होंने अपने पैरों पर खड़े हो जाने के बाद इस रिश्ते को अंजाम देने की ठान ली | पीयूष की इस बेरंग जिंदगी में ख़ुशी का एकमात्र सहारा रीता ही थी |

पीयूष ने तकरीबन 10 सालों तक रीता के सामने अपनी इस परेशानी का जिक्र नहीं किया था | सन 1995 में शुरू हुई ये घटनाएँ साल 2008 में जाकर खत्म हुई | पीयूष की उम्र बढ़ती जा रही थी | परन्तु पीयूष को दिखाई देने वाली उस लड़की के रंग रूप में कोई बदलाव नही आया था |

पीयूष इन बातों को धीरे – धीरे भुलाना चाहता था | परन्तु उस लड़की का यूं दिखाई देने के पीछे राज क्या था ?

बंगाली शादियों में शादी से पहले आशीर्वाद की एक रश्म होती हैं | आशीर्वाद की इस रश्म के बाद परिवारवालों की रजामंदी से शादी से पहले पीयूष और रीता एक – दुसरे के साथ कुछ समय बिताने के लिए नैनीताल गए |

पीयूष और रीता उस दिन शाम को घूमने के लिए निकले | वो दोनों पहाड़ी की एक चोटी पर पहुँचने के लिए ऊपर की ओर चले जा रहे थे | ताकि वहाँ से सूर्यास्त के खूबसूरत नजारें को देखा जा सकें और अपने कैमरे में प्यार के उन हसीन पलों को कैद कर सके |

उनके साथ एक बायनोकुलर भी था, जो पीयूष ने अपने हाथों में ले रखा था | पहाड़ पर ऊपर की ओर चढ़ाई करते वक्त पीयूष ने ऊपर से एक परिवार को नीचे की ओर उतरते देखा | उस परिवार के ठीक सामने चल रही थी | वही 15 साल की बच्ची जिसे वो अक्सर अपनी आँखों के सामने देखा करता था |

वह सुधबुध खोकर उस लड़की को देखा जा रहा था | और वो लड़की भी पीयूष की ओर देखे जा रही थी | और अपने चेहरे पर मुस्कान लिए थी | न जाने पीयूष को अचानक से क्या हुआ | उसने अपने कदम पलटे और दौड़ता हुआ नीचे की ओर जाने लगा |

सब चीजों से अज्ञात रीता उसके पीछे – पीछे दौड़ती गई | और उससे पूछती रही कि तुम्हें अचानक क्या हो गया हैं | हम तो ऊपर जाने वाले थे | फिर अचानक तुम दौड़ते हुए नीचे क्यों जा रहे हो ?

उसने उसके एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया | बस नीचे के ओर बहुत तेजी से दौड़ता चला गया |

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पीयूष और रीता पहाड़ के ऊपर की ओर चढ़ाई कर रहे थे | ताकि वो वहाँ सूर्यास्त के नज़ारे को देखा सके | लेकिन अचानक पीयूष दौड़ता हुआ नीचे की ओर जाने लगा | रीता के लाख पूछने के बावजूद पीयूष ने कुछ कहने से मना कर दिया |

नीचे पहुँचकर ही आखिरकार पीयूष रुका | और रीता अब इतनी ज्यादा परेशान हो गयी थी | कि वो पीयूष से अब कुछ भी पूछने की इच्छुक नहीं थी | दोनों एक दूसरे के सामने खड़े चुपचाप एक दूसरे को देखते जा रहे थे | तभी रीता ने उससे पूछा – कि तुम्हारी प्रोब्लम क्या हैं ?

इससे पहले कि पीयूष रीता को कोई जवाब दे पाता | किसी ने पीछे से उसको छूते हुए उसे बुलाया | पलटकर देखते ही नैनीताल की ठंड में उसके सिर से पसीना बह रहा था | डर से उसके पाँव कांप रहे थे |

पीयूष उस लड़की पर चिल्लाता हुआ पूछ रहा था | क्यों परेशान कर रहे हो ? क्यों मेरे पीछे – पीछे आती रहती हो ?

उसकी सभी बातों को सुनने के बाद उस लड़की ने कहा – अंकल आपका बायनोकुलर गिर गया था | बायनोकुलर लेकर पीयूष ने एक बार रीता की तरफ देखा | रीता उसे अजीब सी नजरों से देख रही थी | फिर पीयूष वापस उस लड़की की तरफ पलटा |

जो अब वहाँ थी ही नहीं | उसने रीता से पूछा – क्या तुमने उस लड़की को देखा ? तो उस पर चिल्लाती हुई कहने लगी | तुम क्या पागलों की तरह बात कर रहे हो ? किस लड़की की बात कर रहे हो ? मैंने तो किसी भी लड़की को यहाँ नहीं देखा |

उसको लग रहा था कि रीता उससे झूठ बोल रही है | आज पहली बार पीयूष ने उस लड़की की आवाज भी सुनी थी | उसे यकीन था कि उसने उसी लड़की को देखा | जो उसके सपने में आती थी | और जो उसे वहाँ दिखाई देती थी |

रीता पीयूष पर बहुत गुस्सा थी | उसे समझाने के लिए पीयूष ने उसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा राज बताया | रीता को उसकी बातों पर जरा सा भी विश्वास नहीं हो रहा था | उसने पीयूष की बहन तापूशी से बात करी |

और तब जाकर उसे यकीन आया कि पीयूष सच बोल रहा था | सच जानने के बाद भी दोनों के बीच मनमुटाव बने रहे | क्योंकि ये सच छुपाने के लिए रीता उसे कभी माफ़ नहीं कर सकती थी |

झगड़ते – झगड़ते रात काफी हो गयी थी | और दोनों सोने चले गए | ये रात पीयूष के लिए आखिरी रात थी उसके सपनो के हिसाब से | इस रात पीयूष को एक बार और सपना आया | जहाँ उस लड़की ने उससे कहा – शायद तुम मुझे नहीं पहचान पा रहे हो |

ये बाद आज से 40 साल पुरानी हैं | आपने मेरी और मेरी मां की संपत्ति हड़पने के लिए हमारा खून कर दिया था | पिछले जन्म में आप मेरे पिता थे | आपको देखकर कभी मुझे डर से रोना आता था | तो आपकी हालत देखकर हंसी |

बस इसके साथ ही उसका ये सपना खत्म हो गया | और पीयूष की नींद टूट गयी | उस दिन के बाद पीयूष ने दुबारा कभी उस लड़की को अपने सपने में नहीं देखा |

 

मैं हूँ प्रवीण और ये थी आज की एक कहानी ऐसी भी |

Credit : 93.5 Red FM India

एक कहानी ऐसी भी

सीजन1  एपिसोड 2

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Note : – यह कहानी हमने नहीं लिखी है हमने केवल इसे यूट्यूब से सुनकर लिखा हैं | जिसका क्रेडिट हमने इसे बनाने वाले को दिया हैं |

भूत – प्रेत की कहानियाँ

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