Newton ( न्यूटन ) के नियम

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न्यूटनके नियम तीन नियम जो पूरे ब्रह्माण्ड पर लागू होते हैं |

Newton ( न्यूटन ) का प्रथम नियम – यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में हैं | तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी या यदि वह एक समान चाल से सीधी रेखा में चल रही हैं | तो वैसे ही चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगा कर उसकी अवस्था में परिवर्तन न किया जाये | उदाहरण – दौड़ती हुई ट्रेन को जब तक ब्रेक लगा कर रोका ना जाये | यहाँ वस्तु तो ट्रेन हैं और ब्रेक लगाना बाहरी बल का कार्य करता हैं |

वस्तुद्वारा अपनी विराम अवस्था या गति अवस्था को बनाये रखने की प्रवृति को जड़त्व (वस्तु का अपनी प्रारंभिक स्थिति में जमे रहना ) कहते हैं | उदाहरण –1. ठहरी हुईरेलगाड़ी या बस के अचानक चल पड़ने पर उसमे बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं |

2. चलतीहुई बस के अचानक रुकने पर उसमे बैठे यात्री आगे की ओर झुकते हैं | अर्थात् यहाँवस्तु रेलगाड़ी या बस में बैठे हुए यात्री हैं | जो जड़त्व के कारण अपनी प्रारंभिकस्थिति में बने रहना चाहते हैं |

Newton ( न्यूटन ) का दितीय नियम –

संवेग – किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग केगुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहते हैं |

                                  अर्थात्    संवेग = वेग X द्रव्यमान

किसीवस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होती हैंतथा संवेग परिवर्तन बल की दिशा में होता हैं | यदि आरोपित बल F, तो बल की दिशा मेंउत्पन्न त्वरण a एवं वस्तु का द्रव्यमान m हो तो न्यूटन के दुसरे नियम के अनुसार F= ma अर्थात् न्यूटन के दुसरे नियम से बल का व्यंजक प्राप्त होता हैं |

Newton ( न्यूटन ) का तृतीय नियम ( क्रिया प्रतिक्रिया नियम ) – प्रत्येक क्रिया के बराबर, परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती हैं | उदाहरण –1. बन्दूक से गोली चलाने पर, चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगता हैं | 2. रॉकेट को उड़ाने पर रॉकेट इंजन विपरीत थ्रस्ट पैदा करते हैं | 3. जब हम किसी गर्म बर्तन के हाथ लगाते हैं तो हमारा हाथ जलता हैं और हम तुरंत हाथ हटा लेते हैं |

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