9 अनोखे मांसभक्षी पौधें

9 अनोखे मांसभक्षी पौधें

आप सोचतें होगें कि दुनिया में केवल इंसान और जानवर ही मांसाहारी होते हैं लेकिन ऐसा नहीं हैं | पृथ्वी पर कुछ ऐसे भी पेड़ – पौधें हैं जो पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलने के कारण और पोषक तत्वों की भरपाई के लिए तरह – तरह के जाल बिछाकर के छोटे – छोटे जीवों और कीड़े – मकोड़ो को आकर्षित करके अपना भोजन बनाते हैं | मांसाहारी पौधें ( Carnivore plants ) की 600 से अधिक प्रजातियाँ पायी जाती हैं |

Carnivore plants
Sarracenia ( सर्रासेनिया ) –

यह एक चमकदार कीड़े खाने वाला शिकारी हैं | जो उत्तर अमेरिका के दलदल और दक्षिणी अमेरिका के दक्षिणी – पूर्व भाग में पायें जाते हैं | इसके फूल उज्जवल होते हैं और सीधे एक फनल की तरह ऊपर उठे हुए होते हैं | फनल के नीचे से एक मीठा रस निकलता हैं जो नीचे जमा होता हैं | इस रस को पाने के लिए कई प्रकार के कीड़े – मकोड़े और छोटे जीव इसके अन्दर चले जाते हैं | और वापस नहीं आ पाते क्योंकि फूलों के रेशे अन्दर की ओर मुड़े हुए और फिसलन भरे होते हैं | फूल के ऊपर एक ढक्कन होता हैं जो बारिश के पानी को अन्दर जाने से रोकता हैं | जीव अन्दर फंस जाता हैं और अन्दर स्थित तरल उसका भक्षण कर उससे आवश्यक तत्वों को चूसकर पौधें को पोषण प्रदान करता हैं |

Nepenthes ( निपेंथस ) –

यह भी एक मांसाहारी पौधा ( Carnivore plants ) हैं | यह पौधा चीन, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपिंस के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाया जाता हैं | इस पौधें की अब तक 80 प्रजातियाँ खोजी जा चुकी हैं |

यह सामान्यता एक बेल के रूप में पाया जाने वाला पौधा हैं | इसका नाम इसके पत्तों के विशेष रूप से मिलता हैं | यह एक मटके की तरह दिखता हैं | इसके विशेष आकार के कारण इसे मंक के नाम से भी जाना जाता हैं जो एक जापानी शब्द हैं | शोधकर्ताओं के अनुसार बन्दर अक्सर इनके अन्दर जमा हुए बारिश के पानी को पीते हैं | इनके मटकों का आकार इतना बड़ा होता हैं कि ये चूहे, मेंढक और छोटे पक्षियों को भी अपना शिकार बना लेते हैं |

इसके मटके के अन्दर ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं जो नेक्टर नाम के एक चिपचिपे तरल का स्रावन करती हैं | जो कीट – पतंगो को आकर्षित करता हैं | इसके मटके के अन्दर की दीवार बहुत ही फिसलन भरी होती हैं | जिससे कीट – पतंगे उससे बाहर नहीं आ पाते और उस तरल में डूब कर मर जाते हैं | फिर ये उस जीव को धीरे – धीरे पचा लेते हैं |

Byblis ( बायब्लिस ) –

यह एक झाड़ीदार पौधा हैं जो उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों तथा न्यू गिनी के दक्षिण में पाया जाता हैं | पत्तों के चमकीले रेशों के कारण इस पौधें को Rainbow Plant ( इन्द्रधनुष पौधा ) के नाम से भी जाना जाता हैं | धूप में इसके पौधें और भी लम्बे और चमकीले हो जाते हैं | रेक्टा नामक ग्रंथि से एक चिपचिपा पदार्थ और एन्जाइम निकलता हैं | छोटे – छोटे जीव और कीड़े – मकोड़े इसके बनाये जाल में फंस जाते हैं | और यह पौधा उससे पोषण प्राप्त करता हैं |

Genlisea ( गेन्लिसा ) –

यह सामान्यता आर्द्रस्थलीय और आर्द्रजलीय वातावरण में पाया जाता हैं | यह पौधा सेंट्रल अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका में पाया जाता हैं | यह एक छोटा घास जातीय पौधा हैं | इसमें पीले रंग के फूल खिलते हैं | जो शिकार को अपनी ओर आकर्षित करते हैं | इस पौधें के दो तरह के पत्ते होते हैं | एक जमीन से ऊपर सांस लेने के लिए और दुसरे विशेष भूमिगत जो शिकार को लुभाने व शिकार को पचाने के काम आते हैं | भूमिगत पत्तियाँ पानी सोखने का कार्य भी करती हैं और पेड़ को जमीन से जोड़कर रखने का कार्य करती हैं | क्योंकि इनमे जड़ें नहीं पायी जाती हैं | जमीन के नीचे ये पत्ते खाली ट्यूब बनाते हैं | जो स्पायरल की तरह दिखते हैं | पानी की धारा के साथ आये जीव इनमे फंस जाते हैं और ये उनसे बाहर नहीं निकल सकते हैं | और पेड़ द्वारा उन्हें पचा लिया जाता हैं |

Darlingtonia Californica ( डार्लिंगटोनिया कैलीफोर्निका ) –

यह कैलीफोर्निया का बहुत ही दुर्लभ पौधा हैं | यह डार्लिंगटोनिया प्रजाति का एकमात्र पौधा हैं | जो उत्तरी कैलीफोर्निया के दलदली इलाकों में पाए जाते हैं | ये पौधा फन फैलाये हुए कोबरा साँप के जैसा लगता हैं | इसलिए इसे कोबरा प्लांट भी कहा जाता हैं | यह एक मीठा सुगन्धित पदार्थ छोड़ता हैं जो कीट – पतंगों को आकर्षित करता हैं | इस पौधें के अंदरूनी भाग में अनेक फनल के चेंबर बने होते हैं | जिस कारण कीड़े – मकोड़े इन फनल में फंस कर मर जाते हैं और पौधा इन कीट पतंगो से पोषण प्राप्त करता हैं |

Utricularia ( युट्रीकुलेरिया ) –

इसे ब्लेडर वर्ल्ड के नाम से भी जानते हैं | यह पादप स्थिर जलाशयों में पायें जाते हैं | इस पादप की 220 से भी अधिक प्रजातियाँ पायी जाती हैं | यह एकमात्र ऐसा पौधा है जो पानी के अन्दर छोटे जीवों या प्लांक को पकड़ने के लिए पानी के बुलबुलों का इस्तेमाल करता हैं |

Carnivore plants
डायनिया का पादप
Drosera ( ड्रोसेरा ) –

यह एक युरोपियन मांसभक्षी पादप ( Carnivore plants ) हैं | इस पौधें की 120 से अधिक प्रजातियाँ ज्ञात हैं | इसे इसमें उगने वाले सफ़ेद रंग के फूलों से पहचाना जाता हैं | इस पादप से एक तरल चिपचिपा रस निकलता हैं | यह चिपचिपा पदार्थ जहर की तरह कार्य करता हैं जो शिकार को मारने के काम आता हैं | जब कोई कीट इस पादप के फूलों पर बैठता हैं तो कीट चिपचिपे पदार्थ के कारण चिपक जाता हैं और फूल बंद हो जाता हैं | यह पादप शिकार को पचाने के लिए एंजाइम का उपयोग करता हैं | इस पादप की कुछ प्रजातियाँ मेंढको और छोटे पक्षियों को भी अपना शिकार बना लेती हैं |

Pinguicula ( पिंगुइकुला ) –

इनमे बैंगनी रंग के फूल पायें जाते हैं | जो शिकार को आकर्षित करते हैं | इनमे बड़े – बड़े पत्ते पायें जाते हैं जो चिपचिपे गोंद जैसे पदार्थ से ढके होते हैं | इसकी अमेरिका, यूरोप, एशिया में 80 प्रजातियाँ पायी जाती हैं |

Aldrovanda Vesiculosa ( एन्द्रोवेंडा वेसीकुलेसा ) –

इस पादप में जड़ें नहीं पायी जाती यह जलीय मांसाहारी पादप ( Carnivore plants ) हैं | जो छोटे –छोटे जलीय प्राणियों का शिकार करता हैं | यह पौधा बहुत ही तेज गति ( एक मिनट में 9 मिलीमीटर ) से बढ़ता हैं | इस पादप की 6 से 11 सेमी. लम्बी शाखाएँ होती हैं |

No comments:

Recent Post

ads
Powered by Blogger.