दुनिया की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण

कारखानों से निकलता धुँआ वायु को प्रदूषित करता हुआ

दुनिया की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण

प्रदूषण ( Pollution ) शायद दुनिया की सबसे बड़ी समस्या हैं | प्रदूषण अपशिष्ट पदार्थों के कारण होता हैं | प्रदूषण के कारण हर साल 90 लाख से भी अधिक लोग मारे जाते हैं | हम लोग चारों ओर से अनेक तरहों के प्रदूषणों से घिरे हुए हैं | अमेरिका प्रदूषण फैलाने के मामलें में सबसे आगे हैं | अमेरिका में दुनिया के केवल 5 % लोग रहते हैं | लेकिन अमेरिका हर साल कुल कचरे का 30 % और कुछ CO2 का 25 % उत्पादित करता हैं | जबकि चीन कुल कचरे का 20 % और कुल CO2 का लगभग 16 % उत्पादित करता हैं | लेकिन कुछ समय से प्रदूषण फैलाने के मामलें में चीन ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया हैं | आज हम प्रदूषण को अच्छी तरह से समझने का प्रयास करेंगे कि प्रदूषण से हमें और सभी जीव – जंतुओं को क्या हानियाँ हैं | इस लेख में हम प्रदूषण के कारण, प्रकार, प्रभाव और प्रदूषण को खत्म करने के उपायों के बारे में जानेगें |

प्रदूषण के प्रकार ( Kinds of Pollution ) – प्रदूषण के कई प्रकार होते हैं | लेकिन ये कुछ सबसे मुख्य प्रदूषण हैं |

लापरवाही से Dustbin के बाहर डाला हुआ कचरा

  1. जल प्रदूषण ( Water Pollution ) जल प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या हैं | जल जो जीवन के लिए सबसे आवश्यक चीज हैं | इसका प्रदूषित होना बहुत हानिकारक प्रभाव ड़ालता हैं | हर वर्ष मनुष्यों द्वारा जल में 14 बिलियन पाउंड ( Pound ) कचरा पानी में ड़ाल दिया जाता हैं | अभी भी दुनिया के 2.5 अरब से अधिक लोगों को पीने योग्य साफ़ पानी नही मिल पाता हैं | जल प्रदूषण के कारण हर वर्ष 1,00,000 समुद्री स्तनधारी जीव, 10,00,000 से अधिक समुद्री पक्षी मारे जाते हैं | प्रदूषित जल के कारण विश्वभर में हर वर्ष 50,00,000 से अधिक लोग मारे जाते हैं | केवल भारत में ही हर वर्ष लगभग 22,00,000 लोग पानी संबंधित बिमारियों के कारण मारे जाते हैं |

जल प्रदूषण के कारण ही चीन में लगभग 50 करोड़ लोगों को पीने का साफ़ पानी भी नही मिल पाता हैं | जिससे चीन में हर साल 12 लाख से अधिक लोग समय से पहले ही मर जाते हैं |

  1. वायु प्रदूषण ( Air Pollution ) सभी प्रदूषणों में से वायु प्रदूषण सबसे अधिक लोगों और जीवों को नुकसान पहुँचाता हैं | WHO ( World Health Organization या विश्व स्वास्थ्य संगठन ) के अनुसार हर साल पूरी दुनिया में लगभग 46 लाख लोग वायु प्रदूषण ( Air Pollution ) के जहरीले प्रभाव के कारण मारे जाते हैं | केवल चीन में ही हर वर्ष 16,00,000 लोग वायु प्रदूषण के कारण मारे जाते हैं | वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों लोगों के साथ – साथ करोड़ो जीव – जन्तु भी मारे जाते हैं | इससे पेड़ – पौधों की पत्तियों पर विषैले पदार्थ जमा हो जाते हैं और पेड़ – पौधों का विकास बाधित होता हैं | चीन, अमेरिका, रूस और भारत जैसे बड़े देश वायु प्रदूषण फ़ैलाने में सबसे आगे हैं |
    Smog के प्रभाव से बचने के लिए Mask का इस्तेमाल करता युवक

  2. ध्वनि प्रदूषण ( Noise Pollution ) ध्वनि को मापने की इकाई डेसीबल हैं | 120 डेसीबल से अधिक का शोर मनुष्यों के पर्दे फाड़ने के लिए काफी हैं | पहले ध्वनि प्रदूषण सामान्यता शहरी इलाकों की समस्या होती थी | क्योंकि वहाँ अधिक मशीनें और वाहन हुआ करते थे | लेकिन अब गावों – कस्बों में भी उद्धोगों और अत्यधिक परिवहन के कारण ध्वनि प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन गयी हैं | ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों में अनेक तरह की बीमारी पैदा होने लगी हैं | बच्चों और बुजुर्गों में दिमाग और ह्रदय सम्बंधी समस्याएँ बहुत अधिक बढ़ गयी हैं | जिससे लोग तनाव महसूस करते हैं और इससे लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ गया हैं | मनुष्यों के साथ – साथ जीव – जंतुओं के व्यवहार में भी बदलाव आया हैं | ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य बहरेपन का शिकार हो रहा हैं | कुछ स्थितियों में तो मनुष्य जीवनभर के लिए बहरा हो जाता हैं |
  3. मृदा प्रदूषण ( Soil Pollution ) – मृदा प्रदूषण उन प्रदूषणों में शामिल हैं जिसका हम सभी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता हैं | मृदा प्रदूषण का सबसे मुख्य कारण मानवीय क्रियाकलाप हैं | मनुष्यों द्वारा लापरवाही से मृदा में कचरा और विभिन्न प्रकार के रसायन ड़ाल दिए जाते हैं | जिससे मृदा प्रदूषित हो जाती हैं | इसके कारण मृदा का उपजाऊपन या तो कम हो जाता हैं | या मृदा पूरी तरह से बंजर हो जाती हैं | इस मृदा में उगने वाले पेड़ – पौधों में भी हानिकारक रसायन घुल जाते हैं | जब इन पेड़ – पौधों को कोई जीव जन्तु खाता है तो ये हानिकारक रसायन आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं | जिसका सभी जीवों पर गहरा प्रभाव पड़ता हैं | ये रसायन मृदा द्वारा जल में भी घुल जाते हैं और जल को भी प्रदूषित करते हैं |

प्रदूषण के कारण ( Causes of Pollution ) –

लोगों द्वारा लापरवाही से डाला गया कचरा Beach पर फैला हुआ

  • प्रदूषण के अनेक कारण हो सकते हैं | लेकिन सभी प्रदूषणों का सबसे बड़ा कारण मानवीय क्रियाकलाप हैं |
  • वायु प्रदूषण मनुष्यों द्वारा लगाये गए बड़े – बड़े उद्दोगों और खाना पकाने के लिए जलायी गयी लकड़ियों के कारण अत्यधिक होता हैं | आज के समय में वायु प्रदूषण में वाहनों का भी बहुत बड़ा हिस्सा हैं |
  • मृदा प्रदूषण खेतों में काम आने वाले जहरीले कीटनाशकों के कारण अत्यधिक होता हैं | कारखानों द्वारा जहरीले Chemical युक्त कचरे को लापरवाही से मिट्टी में Dump करने से भी होता हैं |
  • ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों और मशीनों द्वारा होने वाला अत्यधिक शोर होता हैं | यह कई तरह के मानवीय और प्राकृतिक कारणों जैसे – ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हो सकता हैं |
  • जल प्रदूषण भी मनुष्यों द्वारा नदियों, तालाबों और झीलों में लापरवाही से कचरा और Chemical युक्त अपशिष्ट ड़ालने से होता हैं | जल प्रदूषण मनुष्यों द्वारा जल में मल और ठोस अपशिष्ट ड़ालने से भी होता हैं |
  • जल प्रदूषण प्राकृतिक कारणों से भी होता हैं | जिसमें विदेशी जलीय आक्रामक पेड़ – पौधों की प्रजातियों द्वारा मूल प्रजातियों पर आक्रमण कर उन्हें उनके मूल स्थान से हटा दिया जाता हैं | ये आक्रामक प्रजातियाँ इतनी खतरनाक होती हैं | कि ये सम्पूर्ण जलाशयों को कुछ ही समय में ढ़क लेती हैं | उदाहरण – जलकुंभी ( Water Hyacinth ) |
  • मनुष्यों द्वारा बनायी गयी पॉलीथिन या प्लास्टिक का सभी प्रदूषणों में सबसे अधिक योगदान हैं | पॉलीथिन को जलाने पर वायु प्रदूषण, मिट्टी में पड़े रहने पर मृदा प्रदूषण और जल में पड़े रहने पर जल को दूषित कर जल प्रदूषण करती हैं | पॉलीथिन या प्लास्टिक बिल्कुल भी Eco – Friendly नही हैं |

प्रदूषण के प्रभाव ( Effects of Pollution ) –

प्रदूषण के कारण मरी हुई व्हेल मछली

  • सन 2007 में हुए एक अध्धयन के मुताबिक सन 1950 के बाद से मनुष्य ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण रहा हैं |
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण तनाव, अशांति, नींद नही आना और चिड़चिड़ापन जैसी बीमारियाँ होती हैं | ये सिरदर्द जैसी समस्याओं को भी बढ़ावा देता हैं |
  • वायु प्रदूषण के कारण श्वसन रोग, ह्रदय रोग, छाती में दर्द, गले में सूजन और फेफड़ो संबंधित बहुत से रोग होते हैं |
  • जल प्रदूषण के कारण मनुष्यों को सभी जलीय जीवों में अनेक तरह की बीमारियाँ हो जाती हैं | यहाँ तक कि वे मारे भी जाते हैं | और साथ ही साथ मनुष्यों में भी अनेक बीमारियाँ जैसे – Jaundice, टाइफाइड, मलेरिया और Paratyphoid Fevier जैसी घातक और जानलेवा बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं |
  • मृदा प्रदूषण के कारण प्रदूषित भूमि स्थायी रूप से बंजर हो सकती हैं | जिससे वहाँ पेड़ – पौधें भी नही पनप पायेंगे | प्रदूषित मृदा के सम्पर्क में आने से बच्चों में मानसिक विकार जैसी कई घातक बीमारियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं |
  • जीवनदायक गैस ऑक्सीजन का निर्माण करने वाले पेड़ – पौधों पर भी वायु प्रदूषण का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता हैं | वायु प्रदूषण से पेड़ – पौधों में अनेक रोग हो जाते हैं जिसके कारण इनका विकास रुक जाता हैं |
  • प्रदूषण के कारण विभिन्न आपदाएँ आने का भी खतरा बना रहता हैं | जैसे – कचरे से नदी जाम होने के कारण बाढ़ आना |
  • अत्यधिक CO2 के कारण ही महासागरों की pH कम हो रही हैं |
  • आक्रामक पेड़ – पौधों की प्रजातियाँ मूल पेड़ – पौधों की प्रजातियों को नष्ट कर उनका स्थान ले लेती हैं | जिससे मिट्टी की उर्वरकता कम हो जाती हैं |
  • प्रदूषण के कारण Smog और धुंध उत्पन्न होती हैं | जिससे पेड़ – पौधों तक प्रकाश की मात्रा बहुत कम पहुँच पाती हैं | जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया बाधित होती हैं |
  • ई – अपशिष्ट भी प्रदूषण बढ़ाता हैं | ई – अपशिष्ट एक ऐसा कचरा है जिसे Recycle नही किया जा सकता हैं | यह भी सभी प्रकार के प्रदूषण फैलाता हैं |

प्रदूषण को कम या खत्म करने के उपाय ( Solutions to Reduce or Eliminate Pollution ) –

गोबर से बनी हुई खाद का छिड़काव करता व्यक्ति

  • सबसे पहला तरीका हैं | खाने पीने के बचे हुए सामान और मल – मूत्र की खाद बनायी जाए | यह बनी हुई खाद फसलों और पेड़ – पौधों के लिए Balanced Plant Food साबित होता हैं | इससे बनी हुई मीथेन गैस भी बिना प्रदूषण के रसोईघरों में खाना पकाने में काम आती हैं | इससे कई प्रकार के प्रदूषण होने से बचेंगे |
  • खाद बनाने के लिए केवल पानी और सूक्ष्मजीवों की आवश्यकता होती हैं | जिससे इसमें बहुत कम लागत में ही पर्यावरणीय फायदे के साथ – साथ हमें जलाने के लिए गैस भी प्राप्त होती हैं |
  • कनाडा के अल्बर्टा प्रान्त में Edmonton Composting Facility नामक दुनिया का सबसे बड़ा नगरपालिका Co – Composter हैं | इसके द्वारा हर साल 2,20,000 टन घरेलु कचरा और 22,500 टन सूखे कचरे को 80,000 टन खाद में बदला जाता हैं | यह लगभग 4,16,500 स्क्वायर वर्गफीट में फैला हुआ हैं |
  • आप कचरे को लापरवाही से फेंकने के बजाय उसे कचरा पात्र में ही डालेंगे | अगर कचरा पात्र उपलब्ध न हो तो विभाग से इसकी शिकायत करेंगे |
  • सरकार नदियों और तालाबों जैसे जलस्रोतों में कचरा और अपशिष्ट डालने वालों पर उचित कार्रवाही करेंगे |
  • खेतों में कीटनाशकों का उपयोग करने के बजाय प्राकृतिक खाद और नुकसानदायक कीड़े मारने के प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करेंगे |
  • पुराने हो चुके वाहनों और पुरानी हो चुकी मशीनों को नई और आधुनिक तकनीक से बने हुए वाहनों और नई मशीनों के साथ बदल कर उपयोग करने से ये मशीनें और वाहन कम ईंधन और ऊर्जा का प्रयोग करके अच्छे परिणाम देंगे | जबकि पुराने वाहनों और मशीनों को Recycle करके नया रूप देंगे | इस कार्य में वाहन कम्पनियाँ और सरकार मदद करेंगे | केवल पहल की आवश्यकता हैं |
  • भारत और पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में पेय ( Drinks ) पदार्थों की बोतलों की कीमत अधिक होने के कारण निर्माताओं द्वारा बोतलों को इकट्ठा करके दोबारा से Recycle या Reuse किया जाता हैं | भारत जैसे विकासशील देशों में कबाड़ी वालों द्वारा पुरानी अखबारों और कागजों को खरीदा जाता हैं | ये पुनः इनका उपयोग या तो पैकेजिंग में करते हैं | या फिर इन्हें Recycle करने के लिए कम्पनियों को दे देते हैं |
  • कई विकसित देशों में प्रचुर मात्रा में बोतलों का उपयोग किया जाता हैं | लेकिन इनमें से अधिकांश बोतलें वापस भरने के लिए उपभोक्ताओं द्वारा लौटा दी जाती हैं | डेनमार्क इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं जिसमें लगभग 98 % बोतलें उपभोक्ताओं द्वारा लौटा दी जाती हैं जो अधिकांश दोबारा भरने लायक होती हैं |
  • आप कम दूरी तक जाने के लिए कार या मोटरसाईकिल का उपयोग करने के बजाय साईकिल का उपयोग करें | संभव हो तो पैदल ही वहाँ तक जायें | आपके द्वारा किये गए ऐसे छोटे – छोटे उपायों से ही आप प्रदूषण के स्तर को कम कर सकते हैं |
  • इलेक्ट्रोनिक उपकरणों का उपयोग भी सोच समझकर करें | जहाँ आवश्यकता न हो इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को बंद कर दे |
  • जिन परिवारों में छोटे बच्चे हैं वे Disposable Diaper ( डायपर ) और Nappies का उपयोग करेंगे | जिससे डायपर और Nappies से होने वाले प्रदूषण में निजात मिलेगी |
  • जब ठीक से अपशिष्ट का उपचार हो जाए तो उससे किसी भी तरह का प्रदूषण नही होना चाहिए |
  • पांडिचेरी विश्वविध्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि Vermicompost के उपयोग द्वारा Heavy Metals को भी साफ़ किया जा सकता हैं |
  • दुनिया के कई देशों ने प्रदूषण को रोकने के लिए और पर्यावरण की रक्षा के लिए विश्वव्यापी क़ानून बनाये हैं | जिनसे कुछ हद तक पर्यावरण प्रदूषित होना कम हुआ हैं |

    अपने द्वारा उगाये गये पौधों की देखभाल करती हुई एक महिला

  • प्रदूषण को कम या खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका आम नागरिकों और सभी लोगों द्वारा अधिक से अधिक पेड़ लगाये जाये | इसमें हर व्यक्ति मदद कर सकता हैं | जिस प्रकार जीवित रहने के लिए पेड़ जल आवश्यक हैं | उसी प्रकार ताज़ी हवा तथा अच्छी और बेहतर सेहत के लिए पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना आवश्यक हैं |
  • क्या आप आज से ये कसम खाते है कि आप अपने जीवनकाल के दौरान कम से कम 10 पेड़ लगायेंगे और उन्हें बड़ा होने तक उनकी देखभाल करेंगे | और साथ ही ये वादा भी करें कि आज से किसी भी हरे पेड़ को नही काटेंगे | अगर पूरी दुनिया के लोग यह तय कर ले कि आज से हम हरे पेड़ नही काटेंगे और साथ किसी को भी हरे पेड़ नही काटने देंगे और साथ ही कम से कम 10 पेड़ लगायेंगे | तो वो दिन दूर नही जब कोई भी व्यक्ति प्रदूषण के कारण नही मरेगा |

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