धरती पर जटिल जीवों ( मछली, कीट, डायनासोर, चिम्पांजी, इंसान ) का निर्माण

धरती पर जटिल जीवों ( मछली, कीट, डायनासोर, चिम्पांजी, इंसान ) का निर्माण –

हाल ही में हुई नई रिसर्चों के अनुसार वैज्ञानिकों का मानना हैं कि पृथ्वी की उम्र लगभग 5.4 अरब वर्ष हैं | वैज्ञानिकों को प्रमाण मिले हैं कि जीवन की शुरुआत 3.5 अरब वर्ष पहले हुई थी | पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत जल में हुई थी | जल में प्रारंभिक जीवन की साधारण कोशिकाओं का निर्माण संयोगवश अनुकुल परिस्थितियों में हुआ | उसके बाद कुछ सूक्ष्मजीवों का निर्माण हुआ |

पृथ्वी पर पहले जीव

प्रारंभिक काल में सबसे पहले पनपने वाले जीव आर्किया थे | ये ऐसे जीवाणु हैं जो पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक मूल निवासी हैं | ये सरल रूप में बैक्टीरिया जैसे होते हैं | लेकिन वास्तविक रूप से ये बैक्टीरिया से अलग होते हैं | ये  80 से 100 0C के कठोर गर्म तापमान को भी सहन कर सकते है तथा मरते नहीं हैं | आर्किया अत्यधिक अलवणीय जल व अनोक्सीय ( बिना ऑक्सीजन के ) तथा प्रतिकूल वातावरण में भी आसानी से जीवित रह सकता हैं |

आर्किया ऐसे वातावरण में पायें जाते हैं | जहाँ अन्य जीव नहीं पाए जाते हैं | ये अत्यधिक ख़राब वातावरण में पनपते हैं | आर्किया ऑक्सीजन ग्रहण नहीं करते हैं | इनमे DNA कोशिकाद्रव्य में फैला रहता हैं | आर्किया तथा अन्य बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति की संरचना एक – दुसरे से भिन्न होती हैं | यहीं उन्हें प्रतिकूल आवास में जीवित रखता हैं | आर्किया सभी के लिए बहुत ही अहम होते हैं | क्योंकि ये कार्बन चक्र और नाइट्रोजन चक्र को सम्पन्न करवाने में अहम भूमिका निभाते हैं |

जीवन के प्रारंभिक बैक्टिरियाई अंश –

धरती पर जटिल जीवोंहैलोबैक्टीरिया सरल कोशिकीय संरचना के जीव थे | जिनका रंग बैंगनी था | ये प्रारंभिक जीव पृथ्वी के वातावरण में जल्दी ही नष्ट हो गए | क्योंकि हैलोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण करने में असमर्थ थे | इन बैक्टीरिया के पास ऊर्जा का कोई अच्छा स्रोत नहीं था |

हैलोबैक्टीरिया के बाद पनपने वाले विकसित बैक्टीरिया सायनो बैक्टीरिया

धरती पर जटिल जीवोंसायनो बैक्टीरिया ( नील हरित शैवाल ) जो प्रकाश संश्लेषण से ऊर्जा उत्पादन करते हैं | ये प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले एकमात्र प्रकाश संश्लेषक प्रोकैरियोटिक हैं | सामान्यतया हरे पादपों में क्लोरोफिल A पाया जाता हैं लेकिन सायनो बैक्टीरिया में भी क्लोरोफिल A पाया जाता हैं | सायनो बैक्टीरिया जैलीनुमा आवरण से ढ़के होते हैं | इसलिए ये चिकने होते हैं | यह प्रकाश संश्लेषण करते हैं |

धरती पर जटिल जीवन का निर्माण –

वैज्ञानिकों के अनुसार सरल कोशिकाओं से जटिल कोशिकाओं का निर्माण हुआ हैं | प्रारंभिक काल में सरल जीव बैक्टीरिया व आर्किया धरती पर मौजूद थे | लेकिन इन जीवों में ऐसी काबिलियत नहीं थी कि ये अकेले जटिल जीवन का निर्माण कर सके |

  1. लेकिन नई तकनीक के अनुसार यह पता चला हैं कि प्रारंभिक काल में एक आर्किया में बैक्टीरिया प्रवेश कर गया | लेकिन यह बैक्टीरिया आर्किया के अंदर प्रवेश कर आर्किया की कोशिका में जीवित रह गया | और सहजीवी के रूप में इसकी कोशिका के लिए Power House का कार्य करने लगा | यह आर्किया के लिए ऊर्जा निर्माण करने लगा | इस प्रकार जीवन की जटिल कोशिकाओं का निर्माण हुआ |
  2. जटिल जीवों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला कोशिका अंग माइटोकोंड्रिया को ही वह सहजीवी बैक्टीरिया माना जाता हैं | जो कोशिका के लिए ऊर्जा का निर्माण करता हैं |
  3. जटिल कोशिकाओं के निर्माण के बाद जटिल जीवों का निर्माण हुआ | जैसे – मछली ( रोहु, इलेक्ट्रिक ईल, शार्क ), उभयचर ( मेंढ़क, मगरमच्छ ), कीट ( चींटिया, मच्छर, गुबरेला, मधुमक्खी, बॉम्बर बीटल ), एवीज ( चिड़िया, बाज, चील ) सरीसृप ( डायनासोर, साँप, छिपकली, कोमोडो ड्रैगन ), स्तनधारी ( बन्दर, चिम्पांजी, इंसान ) |

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