अमर जीव

hydra

hydra
हाइड्रा
अमर जीव हाइड्रा

दुनिया का ऐसा अनोखा जीव जिसकी प्राकृतिक मृत्यु कभी भी संभव नहीं हैं | अर्थात यह जीव कभी नहीं मरता हैं | अमर जीव हाइड्रा जो स्वच्छ जल में पाया जाता हैं | हाइड्रा का शरीर स्टेम सैल कोशिकाओं से बना होता हैं | इस प्राणी के शरीर की मूल कोशिकाएँ लगातार विभाजन कर नई कोशिकाएँ बनाने में सक्षम होती हैं | हाइड्रा के शरीर में लगातार नई कोशिकाओं के निर्माण से यह सदैव एक सा बना रहता हैं |

हाइड्रा निडेरीया संघ का जीव हैं |

यह जन्तु 1-2 मिलीमीटर लम्बा होता हैं | हाइड्रा  में अविकसित प्रकार का तंत्रिका तंत्र पाया जाता हैं | जिसे तंत्रिका जाल कहते हैं | हाइड्रा बहुत ही संवेदनशील प्राणी हैं | हाइड्रा के निचले भाग में बेसल डिस्क या कूट पाद पायें जाते हैं जो इसकों जल में स्थित चट्टानों ( आधार सतह ) पर चिपकने में मदद करते हैं | क्योंकि इस बेसल डिस्क से चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता हैं | जिसके कारण यह आसानी से किसी भी सतह पर चिपक जाता हैं | हाइड्रा में शीर्ष भाग पर स्पर्शक या टेंटीकल पायें जाते हैं | ये टेंटीकल शिकार पकड़ने व संवेदना ग्रहण करने में काम आते हैं | टेंटीकल पर छोटी – छोटी अनेक दंश कोशिकाएँ पायी जाती हैं | जो शिकार के छूने पर शिकार के अन्दर न्युरोटोक्सिक जहर डाल देती हैं |

इसमें दंश प्रक्रिया जैली फिश को छू जाने के समान होती हैं |

इसमें लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रकार का जनन पाया जाता हैं |

हाइड्रा में अलैंगिक जनन मुकुलन के द्वारा होता हैं | इसमें पुनरुदभवन ( Regeneration ) की क्षमता पायी जाती हैं | हाइड्रा के अमर होने का कारण हाइड्रा की एक पैतृक कोशिका विभाजन के पश्चात 2 नई पुत्री कोशिकाओं में बदल जाती हैं | जिसके कारण इसकी पैतृक कोशिका जीर्णता से बचते हुए नई कोशिकाओं में बदलती रहती हैं | जिससे ये जीर्णता के कारण कभी नष्ट नही होती हैं | यह प्रक्रिया निरंतर इसी प्रकार चलती रहती हैं और यह जीव अमर बना रहता है |

पैतृक हाइड्रा मे विभाजन ———————- son हाइड्रा + son हाइड्रा ——— son हाइड्रा वृद्धि  ——-  पैतृक हाइड्रा

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