प्राचीन काल में विकसित की गयी कुछ अनोखी धातुएँ

ancient metals

प्राचीन काल में विकसित की गयी कुछ अनोखी धातुएँ
तमोगर्भ लोहा ( Tamogarbha Iron ) 

विमान शास्त्र में वर्णन है कि यह धातु विमान को अदृश्य करने में काम आती है | इस पर प्रकाश छोड़ने से 7 से 75 प्रतिशत प्रकाश सोख लेती हैं | यह धातु रंग में काली और सीसे से भी कठोर तथा गाढ़े सल्फ्यूरिक अम्ल में भी नहीं गलती हैं | जिन मिश्र धातुओं का उल्लेख विमान बनाने के लिए ऋषियों ने किया | उनको बनाने में विभिन्न औषधियों, पत्ते, गोंद, लकड़ी, पेड़ की छाल आदि का उपयोग होता था | इससे इनमे विशेष गुण आते थे |

चाँदी ( Silver )

नागार्जुन के रस रत्नाकर ग्रन्थ में चाँदी के धातुकर्म का वर्णन अदभुत हैं | अशुद्ध चाँदी को सीसा और भस्म ( Dust ) के साथ मिलाकर लोहे के सांचों में पिघलाएं तो शुद्ध चाँदी प्राप्त होता हैं |

सीसा व टिन

गोविंद भगवत्पाद ने अपने रसह्रदयतंत्र सीसे को अयस्क से प्राप्त करने के लिए हाथी की हड्डियों तथा टिन के लिए भैंस की हड्डियों का प्रयोग किया जाता था |

पंच लोहा  

यह रंग में सोने जैसी कठोर तथा भारी है | तांबा आधरित इस मिश्र धातु की विशेषता यह है कि इसमें सीसे का अनुपात 7.95 % हैं | 7.95 % सीसे से मिश्रण वाली अभी तक कोई धातु दुनिया के वैज्ञानिक नहीं बना पाए हैं |

आरर

यह तांबा आधारित मिश्र धातु हैं | जो रंग में पीली और कठोर तथा हल्की हैं | इस धातु पर नमी का असर नहीं होता |

पारद ( Mercury ) –

नागार्जुन के रस रत्नाकर में अयस्क सिनाबार से पारे को प्राप्त करने की आसवन विधि वर्णित हैं | पारे के प्रयोग से न केवल धातु परिवर्तन किया जा सकता था | बल्कि शरीर को निरोगी बनाने और दीर्घायु के लिए भी उसका प्रयोग होता था |

स्पष्टत हड्डियों का कैल्सियम फ्लक्स के रूप में कार्य करते हुए अशुद्धियों को कैल्सियम सिलिकेट धातुमल ( Metal Dust ) के रूप में पृथक कर देता था |

आज ही आधारभूत प्रक्रिया यही हैं जबकि कैल्सियम को जैविक स्रोत के रूप में न प्रयोग कर अकार्बनिक यौगिक के रूप में किया जाता हैं |

आज वर्तमान समय में अनेक स्टील कम्पनियों व विश्वविघालय इन ग्रन्थों पर शोध कर ये धातुएँ बनाने का प्रयास कर रहें हैं | हाल ही में बनारस विश्वविधालय के शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रकार के काँच बनाने में सफलता पाई हैं | जिसका नाम प्रकाश स्तंभन भिद लोहा रखा गया | इसकी विशेषता यह हैं कि प्रकाश को सोखता हैं तथा इंफ्रारेड किरणों को जाने देता है | इसका प्रयोग वातावरण में मौजूद नमी में भी विशेष प्रकार से किया जा सकता हैं | इससे साबित हुआ कि ये प्राचीन ग्रन्थों की सत्यता की पुष्टि करता हैं |

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